Edited By Parveen Kumar,Updated: 04 May, 2026 09:41 PM

भवानीपुर सीट से एक बड़े राजनीतिक उलटफेर में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें 15,113 वोटों के अंतर से पराजय मिली। शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए शानदार जीत दर्ज की।
नेशनल डेस्क : पश्चिम बंगाल का राजनीतिक नक्शा बदलने वाली ममता बनर्जी ने न सिर्फ 15 वर्षों के अपने शासन वाले राज्य में सत्ता गंवा दी है, बल्कि उन्हें अपने राजनीतिक गढ़ भवानीपुर में भी करारी शिकस्त मिली। तृणमूल कांग्रेस, सरकार और विचारधारा को एक ही धुरी पर लाने वाली पार्टी प्रमुख के लिए बंगाल में जनता का फैसला केवल चुनावी नहीं है, बल्कि अस्तित्व का सवाल बन गया है।
भाजपा ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर तृणमूल के 15 साल के शासन का अंत कर दिया है, जबकि राजनीतिक रूप से उसे बनर्जी के गृह क्षेत्र भवानीपुर सीट पर हार से भी बड़ा झटका लगा है, जहां भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया। भवानीपुर की हार ने पिछले विधानसभा चुनाव में बनर्जी की नंदीग्राम सीट पर हार की यादें ताजा कर दीं, जहां शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें हराया था। वर्ष 2021 में, बनर्जी (71) नंदीग्राम सीट हार गई थीं लेकिन बंगाल में शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि 2026 में वह अपनी सीट भी हार गईं और उन्हें भाजपा के हाथों सत्ता भी गवानी पड़ी।
बनर्जी के लिए अब चुनौती सिर्फ चुनावी वापसी की नहीं, बल्कि संगठनात्मक अस्तित्व की भी है। बनर्जी के लिए परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। 71 वर्ष की आयु में, तीन कार्यकाल पूरे करने के बाद, वापसी का रास्ता उनके करियर के किसी भी पिछले पड़ाव से कहीं अधिक कठिन प्रतीत होता है। फिर भी, 'दीदी' के नाम से मशहूर ममता बनर्जी की राजनीति का इतिहास प्रतिरोध से ही फलता-फूलता रहा है। सत्ता से बेदखल होने पर, बनर्जी उसी शैली में लौटने का प्रयास कर सकती हैं जिसमें तृणमूल को विपक्षी ताकत में परिवर्तित करना, और इसकी राजनीतिक शक्ति को फिर से हासिल करना शामिल है।