Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Sep, 2026 11:03 AM

देश में अंडों की बढ़ती कीमतों का असर अब ग्राहकों की खरीदारी पर साफ दिखाई देने लगा है। लोकल सर्कल्स के एक सर्वे के अनुसार, अंडे खरीदने वाले 48 प्रतिशत परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद खरीद की मात्रा कम कर दी है या आवृत्ति घटा दी है। वहीं, 10 प्रतिशत...
नई दिल्लीः देश में अंडों की बढ़ती कीमतों का असर अब ग्राहकों की खरीदारी पर साफ दिखाई देने लगा है। लोकल सर्कल्स के एक सर्वे के अनुसार, अंडे खरीदने वाले 48 प्रतिशत परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद खरीद की मात्रा कम कर दी है या आवृत्ति घटा दी है। वहीं, 10 प्रतिशत लोगों ने सस्ते विकल्प या दूसरे स्रोतों से अंडे खरीदना शुरू किया है। वहीं, 37 प्रतिशत परिवारों ने कीमत बढ़ने के बावजूद पहले जितनी मात्रा में अंडे खरीदना जारी रखा।
84% परिवारों ने महसूस की कीमतों में बढ़ोतरी
सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि पिछले छह महीनों में अंडों की कीमत 10 से 50 प्रतिशत तक बढ़ी है। इनमें 31 प्रतिशत ने 10-25 प्रतिशत और इतने ही लोगों ने 25-50 प्रतिशत तक कीमत बढ़ने की बात कही। 22 प्रतिशत ने 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी बताई। कुल 84 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी स्तर पर कीमत बढ़ने की बात कही।
पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत बड़ी वजह
अंडों की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे पोल्ट्री फीड की लागत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अंडा उत्पादन की कुल लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब 65-70 प्रतिशत बताई जाती है। खासतौर पर मक्के की कीमतों में बढ़ोतरी ने पोल्ट्री उद्योग की लागत पर दबाव बढ़ाया है।
मक्के का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने के कारण इसकी उपलब्धता और कीमत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। फीड की लागत बढ़ने का सीधा असर पोल्ट्री किसानों और अंततः अंडों की खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
अंडों की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता
बढ़ती कीमतों के साथ अंडों की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता सामने आई है। सर्वे में 70 प्रतिशत परिवारों ने अंडों में मिलावट को लेकर खुद को बेहद चिंतित बताया, जबकि 20 प्रतिशत कुछ हद तक चिंतित थे। इस तरह कुल 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने अंडों में मिलावट को लेकर चिंता जताई।
दिसंबर 2025 में एक उपभोक्ता संगठन की ओर से कराए गए लैब टेस्ट में एक ब्रैंडेड अंडे के सैंपल में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के अंश मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में अंडों की निगरानी और जांच के निर्देश दिए थे।
हालांकि, बाद में FSSAI ने स्पष्ट किया था कि अंडे सुरक्षित हैं और अंडों को कैंसर से जोड़ने वाले दावे वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हैं। ऐसे में कीमतों के साथ-साथ गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता भी इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है।