Edited By Tanuja,Updated: 02 Sep, 2026 04:40 PM

DR Congo में Bundibugyo virus से फैला Ebola outbreak बेहद गंभीर हो गया है। 31 अगस्त तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 6,186 confirmed cases में 3,007 लोगों की मौत हो चुकी है। WHO के मुताबिक बीमारी तेजी से फैली है और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, निगरानी की...
Kinshasa: अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला बीमारी का प्रकोप लगातार भयावह होता जा रहा है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस जानलेवा बीमारी से मरने वालों की संख्या 3,007 तक पहुंच गई है, जबकि अब तक 6,186 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि यह प्रकोप बेहद तेजी से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने एक सितंबर को बताया था कि कांगो में संक्रमित लोगों की संख्या 6 हजार पार कर चुकी है और करीब 3 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। संगठन ने इसे अब तक दर्ज किए गए सबसे तेजी से फैलने वाले इबोला प्रकोपों में से एक बताया है। मौजूदा प्रकोप को कांगो के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला संकट बताया जा रहा है। यह बीमारी अब देश के छह प्रांतों और 60 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक फैल चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 26 अगस्त तक के आंकड़ों में 5,794 संक्रमित और 2,786 मौतें दर्ज थीं। इसके बाद कुछ ही दिनों में संख्या और तेजी से बढ़ी।
क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण?
इबोला के इस प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में की गई थी। हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी का फैलाव जनवरी से ही शुरू हो गया हो सकता है। शुरुआत में संक्रमण सीमित क्षेत्रों में था, लेकिन देखते ही देखते यह देश के कई हिस्सों तक फैल गया। कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच की मुश्किल ने बीमारी को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी को रोकने में कई बड़ी बाधाएं सामने आ रही हैं। इनमें कमजोर निगरानी व्यवस्था, प्रभावित इलाकों में असुरक्षा और कुछ समुदायों का स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सहयोग न करना शामिल है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक करीब 60 प्रतिशत मौतें उपचार केंद्रों के बाहर हो रही हैं। इसका मतलब है कि कई मरीजों की पहचान और इलाज समय रहते नहीं हो पा रहा है।
नए विषाणु ने बढ़ाई चिंता
इस बार बीमारी का कारण बुंडिबुग्यो प्रकार का इबोला विषाणु है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यह इबोला बीमारी पैदा करने वाले प्रमुख विषाणुओं में से एक है। इबोला गंभीर बीमारी है और कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है। बुंडिबुग्यो प्रकार के इबोला के लिए फिलहाल कोई विशेष रूप से स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि वैज्ञानिक कई संभावित टीकों और उपचारों पर काम कर रहे हैं। कांगो के अधिकारियों ने अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को एक दूसरे प्रकार के इबोला के लिए बने टीके की खुराक देना शुरू किया है। माना जा रहा है कि इससे कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन बुंडिबुग्यो प्रकार के खिलाफ इसकी पूर्ण प्रभावशीलता स्थापित नहीं है।