देश से साबुत इलायची का निर्यात दो साल में तिगुने से अधिक होकर 43.6 करोड़ डॉलर पर

Edited By Updated: 17 Jul, 2026 04:08 PM

the country s export of whole cardamom has more than tripled

भारत से साबुत इलायची का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से तिगुने से अधिक होकर 43.68 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 13.19 करोड़ डॉलर था। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के

नई दिल्लीः भारत से साबुत इलायची का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से तिगुने से अधिक होकर 43.68 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 13.19 करोड़ डॉलर था। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान साबुत यानी खड़ी इलायची की निर्यात मात्रा भी दोगुने से अधिक हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में खड़ी इलायची का निर्यात 20.12 करोड़ डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 43.68 करोड़ डॉलर हो गया। 

मात्रा के लिहाज से निर्यात 2023-24 के 7,083 टन और 2024-25 के 7,674 टन से बढ़कर 2025-26 में 16,399 टन हो गया। एक अधिकारी ने कहा कि निर्यात में यह तेज बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर प्रीमियम मसालों की मांग बढ़ने, बेहतर गुणवत्ता उत्पादन और भारतीय इलायची की सुगंध एवं शुद्धता के कारण विदेशी खरीदारों की बढ़ती पसंद को दर्शाती है। 

खड़ी इलायची के मुख्य निर्यात गंतव्यों में संयुक्त अरब अमीरात (13.52 करोड़ डॉलर), सऊदी अरब (12.51 करोड़ डॉलर), बांग्लादेश (4.77 करोड़ डॉलर), कुवैत (2 करोड़ डॉलर), इराक (1.37 करोड़ डॉलर) और मलेशिया (0.84 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, चीन, मिस्र और ईरान भी भारत से इलायची आयात करते हैं। भारत में इलायची की खेती मुख्य रूप से छोटी इलायची और बड़ी इलायची के रूप में होती है। 

छोटी इलायची का उत्पादन प्रमुख रूप से केरल (56-58 प्रतिशत हिस्सेदारी) में होता है, जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु अन्य प्रमुख उत्पादक हैं। वहीं, बड़ी इलायची का उत्पादन सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में होता है।
 

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