Edited By Niyati Bhandari,Updated: 30 Sep, 2026 12:18 PM

आंध्रप्रदेश के आदिवासी इलाकों में कॉफी की खेती अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। कॉफी के बागान पर्यटकों को भी आकर्षित करने लगे हैं। पहाड़ियों के बीच कॉफी के पौधों को देखना, आदिवासी जीवनशैली और स्थानीय संस्कृति को करीब से समझना तथा उसी बागान की...
अराकू घाटी (इंट): आंध्रप्रदेश के आदिवासी इलाकों में कॉफी की खेती अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। कॉफी के बागान पर्यटकों को भी आकर्षित करने लगे हैं। पहाड़ियों के बीच कॉफी के पौधों को देखना, आदिवासी जीवनशैली और स्थानीय संस्कृति को करीब से समझना तथा उसी बागान की कॉफी का स्वाद लेना पर्यटकों के लिए नया अनुभव बन रहा है। राज्य में कॉफी खेती को पर्यटन से जोड़कर इको-टूरिज्म का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।
5 दशक में बढ़ा उत्पादन
आंध्र प्रदेश में वर्ष 1976 में करीब 4000 हैक्टेयर क्षेत्र से कॉफी उत्पादन की शुरुआत हुई थी। उस समय करीब 250 मीट्रिक टन उत्पादन होता था। अब यह बढ़कर करीब 15,000 मीट्रिक टन हो गया है। कॉफी बोर्ड ने वर्ष 2047 तक उत्पादन को बढ़ाकर 50,000 मीट्रिक टन करने का खाका तैयार किया है।
कॉफी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी सामला रमेश के अनुसार, कॉफी बागानों में फलदार पौधों, मसालों तथा औषधीय और सुगंधित पौधों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों के लिए साल में करीब 8 महीने आय का आधार तैयार करने की योजना है। मिट्टी की जांच, कवर क्रॉप और खेत के अवशेषों से कम्पोस्ट बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। उत्पादकता को मौजूदा 160 किलो से बढ़ाकर 300 किलो प्रति हैक्टेयर करने का लक्ष्य है।
युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण
सरकार स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए कम्युनिटी कॉफी एंड क्वालिटी सैंटर, रोस्टिंग-ग्राइंडिंग यूनिट और क्यूरिंग वर्क्स को बढ़ावा दिया जाएगा। आदिवासी उत्पादकों और किसान उत्पादक संगठनों को अपने ब्रांड विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों को कच्ची कॉफी बेचने की बजाय तैयार उत्पाद के बाजार से अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
कॉफी क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं को रोस्टिंग, गुणवत्ता जांच, क्यूपिंग और सेंसेरी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसान मानसा के अनुसार, सहायता और बाजार उपलब्ध होने से उनकी आय बढ़ी है। नए मॉडल में खेती के साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पर्यटन को जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।