Edited By ,Updated: 03 Jun, 2015 09:48 AM

एक बार स्वामी विवेकानंद के पास एक आदमी आया और पूछा कि प्रभु भगवान ने हर इंसान को एक ही जैसा बनाया है फिर भी कुछ लोग अच्छे होते हैं, कुछ बुरे, कुछ सफल होते हैं, कुछ असफल ऐसा क्यों?
एक बार स्वामी विवेकानंद के पास एक आदमी आया और पूछा कि प्रभु भगवान ने हर इंसान को एक ही जैसा बनाया है फिर भी कुछ लोग अच्छे होते हैं, कुछ बुरे, कुछ सफल होते हैं, कुछ असफल ऐसा क्यों?
स्वामी जी ने निम्रतापूर्वक कहा कि मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं ध्यान से सुनो, कहा जाता है कि ये धरती रत्नगर्भा है, यहां जन्म लेने के लिए देवी-देवता भी तरसते हैं। एक बार देवी-देवताओं की सभा चल रही थी कि इंसान इतना विकसित कैसे है? कैसे वह इतने बड़े-बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है? ऐसी कौन-सी शक्ति है जिसके दम पर इंसान असंभव को संभव कर डालता है।
सारे देवी-देवता अपने-अपने विचार रख रहे थे। कोई बोल रहा था कि समुद्र के नीचे कुछ ऐसा है जो इंसान को आगे बढऩे को प्रेरित करता है, कोई बोल रहा था कि पहाड़ों की चोटी पर कुछ है। अंत में एक बुद्धिमान ने जवाब दिया कि इंसान का दिमाग ही ऐसी चीज है जो उसे हर कार्य करने की शक्ति देता है।
मानव का दिमाग एक बहुत अद्भुत चीज है। जो इंसान इसकी शक्ति को पहचान लेता है वह कुछ भी कर गुजता है। उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है और जो लोग दिमाग की ताकत का प्रयोग नहीं करते वे लोग जीवन भर संघर्ष ही करते रह जाते हैं। हर इंसान की विजय और पराजय उसके दिमाग के काम करने की क्षमता पर निर्भर है। यह दिमाग ही वह दैवीय शक्ति है जो एक सफल और असफल इंसान में फर्क पैदा करती है। सारे देवी-देवता इस जवाब से बड़े प्रसन्न हुए।
स्वामी जी ने आगे कहा कि आप जैसा सोचते हैं, आप वैसे ही बन जाएंगे। आप खुद को कमजोर मानेंगे तो कमजोर बन जाओगे, खुद को शक्तिशाली मानोगे तो शक्तिशाली बन जाओगे। यही फर्क है एक सफल और असफल इंसान में।