Edited By Tanuja,Updated: 27 Apr, 2026 06:05 PM

Stockholm International Peace Research Institute रिपोर्ट के अनुसार India का सैन्य खर्च 2025 में 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया। वैश्विक खर्च 2.9% बढ़ा, जबकि China और Pakistan ने भी रक्षा बजट में बढ़ोतरी की।
International Desk: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्धों के बीच दुनिया में सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। Stockholm International Peace Research Institute की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2887 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगातार 11वें साल वृद्धि को दर्शाता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, India ने भी अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है। भारत का सैन्य खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया है, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष ने इस खर्च को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इस संघर्ष में लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था, जिसके बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया।वहीं Pakistan ने भी अपने सैन्य खर्च में 11% की बढ़ोतरी की है, जो 11.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पाकिस्तान ने यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चीन से नए हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के कारण की है।दूसरी तरफ China ने अपने रक्षा बजट में 7.4% की वृद्धि की, जो अब 336 अरब डॉलर हो गया है। यह लगातार 31वां साल है जब चीन ने अपने सैन्य खर्च में इजाफा किया है, जिससे उसकी सैन्य ताकत लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाले देशों में United States पहले स्थान पर है, हालांकि उसका खर्च 2025 में 7.5% घटकर 954 अरब डॉलर रह गया।
इसके पीछे मुख्य कारण यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कमी बताया गया है। यूरोप और एशिया में सैन्य खर्च तेजी से बढ़ा है। यूरोप में 14% की वृद्धि देखी गई, जबकि एशिया और ओशिनिया में 8.1% की बढ़ोतरी हुई। इसका कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य क्षेत्रीय तनाव हैं, जिनके चलते देशों ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक GDP का 2.5% हिस्सा सैन्य खर्च पर खर्च किया गया, जो 2009 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे साफ है कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं के कारण हथियारों की दौड़ लगातार तेज होती जा रही है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर शांति की बजाय सैन्य ताकत को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।