परीक्षा से प्रेम संबंधों तक दबाव में घुट रहा जेन-जी, तनाव ले रहा युवाओं की जान

Edited By Updated: 11 Sep, 2026 11:20 AM

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प्रेम संबंधों में नाकामी, परीक्षा और करियर का दबाव तथा सोशल मीडिया पर खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की होड़ का दबाव युवाओं की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या की दर के...

नई दिल्ली (इंट): प्रेम संबंधों में नाकामी, परीक्षा और करियर का दबाव तथा सोशल मीडिया पर खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की होड़ का दबाव युवाओं की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक आत्महत्या की दर के मामले में छत्तीसगढ़ देश के 28 राज्यों में चौथे स्थान पर रहा। प्रदेश में प्रति 1 लाख आबादी पर 26 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जबकि राष्ट्रीय औसत 12.3 रहा। यानी राज्य की दर राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक है।

2023 में 7,868 लोगों ने दी जान
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो  (एन.सी.आर.बी.) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में कुल 7,868 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। हालांकि यह संख्या 2022 के 8,446 मामलों के मुकाबले 6.8 फीसदी कम है, लेकिन आत्महत्या दर अब भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है। राज्यों में सिक्किम, केरल और तेलंगाना के बाद छत्तीसगढ़ का स्थान रहा।

युवाओं पर सबसे ज्यादा दबाव
एन.सी.आर.बी. के राष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि 18 से 30 वर्ष से कम आयु का वर्ग आत्महत्या के लिहाज से सबसे संवेदनशील समूहों में शामिल है। 2022 में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी 34.6 फीसदी थी। युवाओं के सामने पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता, नौकरी की अनिश्चितता, प्रेम संबंधों में टूटन और परिवार की अपेक्षाओं का दबाव एक साथ आ रहा है।

सोशल मीडिया ने बढ़ाई ‘परफैक्ट लाइफ’ की दौड़
विशेषज्ञों के मुताबिक सोशल मीडिया पर लगातार दूसरों की सफलता, महंगी जीवनशैली और उपलब्धियों को देखकर युवा अपनी जिंदगी की तुलना करने लगते हैं। इससे असफलता का एहसास और अकेलापन बढ़ सकता है। कई बार युवा अपनी परेशानी परिवार या दोस्तों से सांझा करने की बजाय उसे भीतर ही भीतर दबाते रहते हैं।

‘कोई सुनने वाला नहीं’ की पीड़ा
एम्स रायपुर के मनोरोग विभाग के एच.ओ.डी. डॉ. लोकेश सिंह के अनुसार आज भी लोग मनोरोग विशेषज्ञ के पास जाने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि समाज उन्हें ‘पागल’ समझेगा। उनका कहना है कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति को कायर कहने की बजाय यह समझने की जरूरत है कि वह गंभीर मानसिक पीड़ा से गुजर रहा हो सकता है और उसे समय पर मदद नहीं मिल पाई।

मदद मांगना कमजोरी नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक परेशानी को बीमारी की तरह स्वीकार करने और समय पर उपचार व परामर्श लेने की जरूरत है। टैली-मानस की 14416 हैल्पलाइन पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध है। परिवार और दोस्तों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। किसी युवा के व्यवहार में अचानक बदलाव, लगातार उदासी, अलग-थलग रहने या निराशा की बातों को नजरअंदाज करने की बजाय उससे बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद दिलाना जरूरी है। एन.सी.आर.बी. के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2023 में कुल 16,011 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। इनमें 230 मौतें प्राकृतिक कारणों और 15,781 अन्य कारणों से हुईं। आकस्मिक मृत्यु दर के मामले में भी प्रदेश देश के राज्यों में तीसरे स्थान पर रहा।

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