Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Sep, 2026 07:58 PM

जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त सच्चे मन से श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने और उपवास रखते हैं और आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरती व भोग लगाकर व्रत खोलते हैं।
Janmashtami Vrat Rules During Periods : जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त सच्चे मन से श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने और उपवास रखते हैं और आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आरती व भोग लगाकर व्रत खोलते हैं। लेकिन महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि यदि जन्माष्टमी के दिन मासिक धर्म आ जाएं तो व्रत रखा जा सकता है या नहीं। क्या लडूड गोपाल की पूजा या सेवा करना सही होता है। तो आइए जानते हैं इससे जुड़े धार्मिक परंपराओं के बारे में-
मासिक धर्म में जन्माष्टमी व्रत रखें या नहीं?
धार्मिक दृष्टि से व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार श्रद्धा, संकल्प और भक्ति माना जाता है। इसलिए मासिक धर्म के दौरान व्रत रखने को लेकर सभी पर एक जैसा नियम लागू नहीं किया जा सकता। कुछ परंपराओं में इस दौरान प्रत्यक्ष पूजा-पाठ या मंदिर के गर्भगृह में जाने से परहेज करने की मान्यता है, जबकि कई परिवारों और भक्ति परंपराओं में महिला को केवल मासिक धर्म के कारण भगवान की भक्ति से दूर नहीं माना जाता। वहीं, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी शरीर की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। यदि पीरियड्स के दौरान कमजोरी, दर्द या थकान अधिक हो तो निर्जला या कठोर व्रत रखने की जिद नहीं करनी चाहिए। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या सामान्य सात्विक भोजन लेकर भी भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया जा सकता है।

क्या पीरियड्स में लड्डू गोपाल की पूजा कर सकते हैं?
लड्डू गोपाल को घर के सदस्य और बाल स्वरूप भगवान के रूप में सेवा देने की परंपरा है। मासिक धर्म के दौरान उनकी पूजा और सेवा को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हैं। जिन परिवारों में इस अवधि में मूर्ति को स्पर्श न करने की परंपरा है, वहां महिला मानसिक रूप से भगवान का ध्यान कर सकती है, कृष्ण मंत्र का जाप कर सकती है और भजन सुन सकती है। परिवार का कोई अन्य सदस्य लड्डू गोपाल को स्नान, वस्त्र, श्रृंगार और भोग अर्पित कर सकता है।

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