Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Oct, 2026 02:01 PM

Kapardish Vinayak Chaturthi 2026: अक्टूबर में आ रही है कपर्दिश विनायक चतुर्थी। जानें गणपति पूजन का सबसे सटीक मध्याह्न मुहूर्त, वर्जित चंद्र दर्शन का समय, काशी के 56 विनायकों से इसका संबंध और 'कपर्दिश' स्वरूप की महिमा। भगवान गणेश के 'कपर्दिश' स्वरूप...
Kapardish Vinayak Chaturthi 2026: अक्टूबर 2026 में बहुत सारे व्रत-त्यौहार आने वाले हैं। उनमें से एक है मासिक विनायक चतुर्थी। जो प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है। इस बार ये दिन भगवान गणेश के कपर्दिश स्वरूप को समर्पित है इसलिए कपर्दिश विनायक चतुर्थी कहलाएगी। गणेश जी के कपर्दिश स्वरूप की पूजा से लाइफ में आ रहे उतार-चढ़ाव से मुक्ति मिलती है। मानसिक अशांति और अस्थिरता समाप्त होती है। कपर्दिश विनायक चतुर्थी का व्रत करने वाले जातक जानें सही तिथि, पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त, चंद्र दर्शन का वर्जित समय और इस स्वरूप की पौराणिक महिमा।

कपर्दिश विनायक चतुर्थी 2026: तिथि एवं पंचांग गणना
पंचांगीय गणना के अनुसार, अक्टूबर माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को रात 11:27 बजे होगी और इसका समापन 15 अक्टूबर 2026 को रात 1:13 बजे होगा। उदयातिथि की शास्त्र सम्मत परंपरा के आधार पर कपर्दिश विनायक चतुर्थी का व्रत 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को रखा जाएगा।
गणपति पूजन का शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन समय
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 13 अक्टूबर 2026, रात 11:27 बजे से होगा और विश्राम 15 अक्टूबर 2026, रात 01:13 बजे होगा।
गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: 14 अक्टूबर 2026, सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:16 बजे तक रहने वाला है।
पूजा की कुल अवधि: 2 घंटे 18 मिनट है।
चंद्र दर्शन से बचने का वर्जित समय: 14 अक्टूबर, सुबह 09:49 बजे से शाम 07:57 बजे तक है। विनायक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन करना वर्जित माना जाता है, इसलिए इस समय के दौरान चंद्रमा की ओर देखने से बचें।
क्या है 'कपर्दिश' नाम का धार्मिक रहस्य?
कपर्दिश शब्द दो शब्दों कपर्द और ईश शब्द से मिलकर बना है। कपर्द का अर्थ है जटाओं का प्रतीक और ईश यानी स्वामी या ईश्वर। भगवान शिव को भी 'कपर्दी' कहा जाता है क्योंकि वे जटाधारी स्वरूप धारण करते हैं। इसी प्रकार, गणेश जी के कपर्दिश स्वरूप में शिव तत्व और तपस्वी भाव का अनूठा समावेश देखने को मिलता है। यह स्वरूप साधकों को जीवन में धैर्य, विवेक, तपस्या और मानसिक अनुशासन की प्रेरणा देता है।

काशी के 56 विनायकों से विशेष संबंध
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कपर्दिश विनायक का संबंध काशी (वाराणसी) की 56 विनायक परंपरा से भी जोड़ा गया है। माना जाता है कि काशी के इस स्वरूप की पूजा से जैसी भी परिस्थितियां हो, व्यक्ति निडर होकर जीवन पथ पर आगे बढ़ता जाता है। अपने जीवन की घोर से घोर समस्या का नाश करने के लिए कपर्दिश विनायक की पूजा अवश्य करें।
कपर्दिश विनायक चतुर्थी पूजा विधि: कपर्दिश विनायक चतुर्थी के दिन घर पर गणपति का विधिवत पूजन करें। चावल के आटे से बने दिये में चौमुखी घी का दीप करें, चंदन से धूप करें, सफेद फूल चढ़ाएं, चंदन से तिलक करें, चावल की खीर का भोग तथा रुद्राक्ष की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद चावल की खीर सफेद गाय को खिला दें।
मंत्र: गं गणपतये नमः
