जानें, क्यों लगाया जाता है घर के आंगन में तुलसी का पौधा

Edited By Updated: 04 Apr, 2019 12:51 PM

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हर हिंदू गृहस्थ के घर के आंगन में प्राय: तुलसी का पौधा लगा होता है। यह हिन्दू परिवार की एक विशेष पहचान है। स्त्रियां इसके पूजन के द्वारा अपने सौभाग्य एवं वंश की समृद्धि की रक्षा करती हैं। रामभक्त हनुमान जी जब सीता की खोज करने लंका गए तो

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हर हिंदू गृहस्थ के घर के आंगन में प्राय: तुलसी का पौधा लगा होता है। यह हिन्दू परिवार की एक विशेष पहचान है। स्त्रियां इसके पूजन के द्वारा अपने सौभाग्य एवं वंश की समृद्धि की रक्षा करती हैं। रामभक्त हनुमान जी जब सीता की खोज करने लंका गए तो उन्हें एक घर के आंगन में तुलसी का वृक्ष दिखलाई दिया। तो वो समझ गए की ये किसी हरि भक्त का घर है। अति प्राचीन परम्परा से तुलसी का पूजन गृहस्थ परिवार में होता आया है। जिनकी संतान नहीं होती वे तुलसी-विवाह भी कराते हैं। तुलसी पत्र चढ़ाए बिना शालिग्राम का पूजन नहीं होता। विष्णु भगवान को चढ़ाए श्राद्ध भोजन में, देवप्रसाद, चरणामृत, पंचामृत में तुलसी पत्र होना आवश्यक है अन्यथा वह प्रसाद भोग देवताओं को नहीं चढ़ता। मरते हुए प्राणी के अंतिम समय में गंगाजल व तुलसी पत्र दिया जाता है। तुलसी जितनी धार्मिक मान्यता किसी भी पौधे की नहीं है।

PunjabKesariइन सभी धार्मिक मान्यताओं के पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है। तुलसी का पौधा एक दिव्य औषधि वृक्ष है तथा कस्तूरी की तरह एक बार मृत प्राणी को जीवित करने की क्षमता रखती है। तुलसी के माध्यम से कैंसर जैसी असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाती है।

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आयुर्वेद के ग्रंथों में तुलसी की बड़ी भारी महिमा बताई गई है। इसके पत्ते उबाल कर पीने से सामान्य ज्वर, जुकाम, खांसी एवं मलेरिया में तत्काल राहत मिलती है। तुलसी के पत्तों में संक्रामक रोगों से रोकने की अद्भुत शक्ति है। प्रसाद पर इसको रखने से प्रसाद खराब नहीं होता। पंचामृत व चरणामृत में इसको डालने से बहुत देर रखा गया जल व पंचामृत खराब नहीं होते, उसमें कीड़े नहीं पड़ते।PunjabKesariतुलसी की मंजरियों में एक विशेष खुशबू होती है, जिससे विषधर सांप उसके निकट नहीं आते। यदि रजस्वला स्त्री इस पौधे के पास से गुजर जाए तो वह फौरन म्लान हो जाता है। इसके अनेक औषधीय गुणों के कारण ही इसकी पूजा की जाती है।

PunjabKesari‘रणवीर भक्ति रत्नाकर’ ग्रंथ के अनुसार तुलसी की गंध से सुवासित वायु जहां तक घूमती है वहां तक दिशा और विदिशाओं को पवित्र करती है और प्राणियों को प्राणवान करती हैं। ‘क्रियायोगसार’ नामक एक अन्य ग्रंथ के अनुसार-तुलसी के स्पर्श मात्र से मलेरिया इत्यादि रोगों के कीटाणु एवं विविध व्याधियां तुरंत नष्ट हो जाती हैं।

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