Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Oct, 2026 12:17 PM

हर साल की तरह इस बार भी मां दुर्गा के आगमन का भक्त बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि शारदीय नवरात्रि के आरंभ में अब बस कुछ ही दिन शेष बचे हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए लाखों भक्त श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत...
Navratri Fast Broken Remedies 2026 : हर साल की तरह इस बार भी मां दुर्गा के आगमन का भक्त बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि शारदीय नवरात्रि के आरंभ में अब बस कुछ ही दिन शेष बचे हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए लाखों भक्त श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखते हैं। लेकिन ऐसे बहुत से भक्त होते हैं जो व्रत तो रखते हैं लेकिन उन्हें सही से नियम नहीं पता होते हैं और जाने-अनजाने में हुई गलती से व्रत खंडित हो जाता है। ऐसे होने पर सबसे पहली बात मन में जो आती है वह यह कि क्या व्रत टूट गया, क्या इसका दोष लगेगा या फिर कहीं देवी दुर्गा तो हमसे नाराज़ तो नहीं हो जाएंगी? बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत केवल खान-पान का नियम नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम और संकल्प का भी प्रतीक माना जाता है। अगर किसी वजह से व्रत का नियम टूट जाए, तो घबराने के बजाय श्रद्धा और सही विधि से प्रायश्चित करना महत्वपूर्ण माना जाता है। तो आइए जानते हैं वे तरीके क्या है और क्या दोबारा व्रत रखना जरूरी है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सबसे पहले बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर किसी व्यक्ति ने नवरात्रि का व्रत रखा है और वह उससे जुड़े सभी नियमों को पहले से जानता है लेकिन फिर भी लापरवाही के कारण व्रत टूट गया है तो इसे गलत माना जाता है लेकिन यदि व्रत अनजाने में और गलती से टूट जाए तो सबसे पहले घबराने की जगह खुद को शांत रखने की कोशिश करें और माता रानी के सामने दीप जलाएं और पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से देवी से क्षमा याचना करें। इसके बाद आरती पूजा करके पुनः व्रत का संकल्प लें। दरअसल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत को बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता इसलिए अचानक हुई भूल के लिए क्षमा मांगने के बाद व्रत जारी रखें।
इसके अलावा अन्य उपायों की बात करें मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना भी बेहद शुभ और लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर व्रत के दौरान कोई त्रुटि हो जाए तो “ॐ दूं दुर्गायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं और साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि इन दोनों उपायों को करने से मन को शांति मिलती है और साथ ही व्रत से जुड़े दोषों का प्रभाव कम हो जाता है।

आगे बता दें कि व्रत के नियम में अनजाने में कोई त्रुटि हो जाए, तो एक धार्मिक मान्यता के अनुसार सबसे पहले मुख की शुद्धि करने के लिए 12 बार कुल्ला करने की बात कही गई है इसके बाद देवी मां की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और पूरे श्रद्धा भाव से दोबारा पूजा-अर्चना करें। माना जाता है कि इस प्रक्रिया के जरिए भक्त अपनी भूल के लिए मां भगवती से क्षमा प्रार्थना करता है और मन में शांति का अनुभव करता है। साथ ही, पूजा को श्रद्धा और विधि के साथ पूर्ण करने का भाव भी बना रहता है।
इसके अलावा व्रत में हुई भूल के लिए अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है। आप दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्र जैसी वस्तुएं किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकते हैं। यदि संभव हो, तो उसी दिन या अगले दिन दो कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें फल, वस्त्र या दक्षिणा देकर सम्मानित करें। धार्मिक मान्यता में कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप माना जाता है, इसलिए कन्या पूजन को मां भगवती के प्रति श्रद्धा और क्षमा-प्रार्थना का एक माध्यम माना जाता है।

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