Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Sep, 2026 08:24 AM

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में कहा कि निजी धार्मिक संस्था या ‘शरिया अदालत’ को कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है और ऐसी संस्था को संविधान या कानून के तहत गठित न्यायालय की तरह वैवाहिक स्थिति तय करने का अधिकार नहीं है।
बिलासपुर (एजैंसी): छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में कहा कि निजी धार्मिक संस्था या ‘शरिया अदालत’ को कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है और ऐसी संस्था को संविधान या कानून के तहत गठित न्यायालय की तरह वैवाहिक स्थिति तय करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने सोमवार को सुनाए गए फैसले में ‘इदारा-ए-शरिया इस्लामी अदालत’ की ओर से 18 जनवरी 2022 को जारी उस आदेश को कानूनी अधिकार से रहित करार दिया, जिसमें याचिकाकर्त्ता महिला को उसके पति द्वारा तलाक दिए जाने की घोषणा की गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “धर्म किसी व्यक्ति की अंतरात्मा और व्यक्तिगत आस्था का मार्गदर्शन कर सकता है, लेकिन किसी भी धार्मिक संस्था या निजी निकाय को कानून द्वारा स्थापित न्यायालय का अधिकार ग्रहण करने या किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति और अधिकारों का निर्धारण अथवा प्रवर्तन करने के साधन के रूप में धार्मिक विश्वास का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानून का शासन और संवैधानिक ढांचा सर्वोपरि बने रहते हैं।”
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