Edited By Niyati Bhandari,Updated: 08 Sep, 2026 11:34 AM

Laddu Gopal Chhathi 2026 Date & Puja Vidhi: साल 2026 में बाल गोपाल की छठी कब मनाई जाएगी? जानिए लड्डू गोपाल के पंचामृत स्नान, श्रृंगार, काजल लगाने की रस्म और कढ़ी-चावल के विशेष भोग की सही विधि।
Laddu Gopal Chhathi 2026: गोकुल के बाल गोपाल द्वारकाधीश बन चुके हैं। यहां तक की उनके द्वार दिया गया गीता ज्ञान संसार के कण-कण में बसा है। फिर भी उनके बाल रुप को ही भक्तों के द्वारा सबसे अधिक पूजा जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा का खुले दिल के साथ स्वागत करने के बाद नन्द उत्सव और दही हांडी की खूब धूम रही। अब कृष्ण भक्तों को बाल गोपाल की छठी का इंतजार है यानी जब वो 6 दिन के होंगे तो उन्हें नवजात शिशु मानकर उनका विशेष लाड-प्यार से श्रृंगार और सेवा-पूजा की जाएगी। छठी मनाने की बेहद खूबसूरत परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में लड्डू गोपाल की छठी कब मनाई जाएगी और इस दिन किस विधि से कान्हा की सेवा करनी चाहिए।

Laddu Gopal Chhathi 2026 Date लड्डू गोपाल की छठी की सही तिथि
4 सितंबर 2026, शुक्रवार को जन्माष्टमी थी। 5 सितंबर 2026, शनिवार के दिन नन्द उत्सव और दही हांडी बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अब बाल गोपाल के जन्म लेने के ठीक छठे दिन उनकी छठी मनाई जाएगी। 9 सितंबर 2026, बुधवार को छठी उत्सव होगा।
हिंदू पंचांग की गणना और स्थानीय परंपराओं में मतभेद होने के कारण, कुछ स्थानों पर यह पर्व 10 सितंबर, गुरुवार को भी मनाया जाएगा।

Laddu Gopal Chhathi Puja Vidhi लड्डू गोपाल छठ पूजा विधि
लड्डू गोपाल की सेवा नवजात बच्चे की तरह सुबह ब्रह्म मुहूर्त से आरंभ करें। पंचामृत से स्नान करवाने के बाद शुद्ध जल से एक बार फिर स्नान कराएं। नरम तौलिए से पोंछ कर इत्र लगाएं। सुंदर वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें। मस्तक पर तिलक लगाएं।
Kajal Ritual on Laddu Gopal Chhathi कान्हा को नजर दोष से बचाने के लिए इस विधि से लगाएं काजल
किवंदतियों के अनुसार जब यशोदा मईया बाल गोपाल को सुबह नहला कर तैयार करती थी तो उन्हें नजर दोष से बचाने के लिए काजल से काला टिका लगाती थी। ताकि उन्हें किसी की नजर न लग पाए। ऐसा एक मां का विश्वास था। आज भी भारत का बहुत सारी माताओं का ऐसा विश्वास है की काजल से लगाया गया काला टिका उनकी संतान की बुरी बलाओं से रक्षा करता है।
बाल गोपाल की छठी के दिन उन्हें बुरी नजर से बचाने के लिए काजल लगाने की विशेष परंपरा है। लड्डू गोपाल की आंखों में, उनके दोनों तलवों पर और कान के पीछे काजल का एक छोटा सा टीका (नजर का टीका) लगाया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू गोपाल को काजल लगाने के बाद जो काजल बच जाता है, उसे घर के सभी सदस्य अपनी आंखों में लगा सकते हैं, इससे अत्यंत शुभ माना जाता है।

Bhog for Laddu Gopal Chhathi कढ़ी-चावल का विशेष भोग और अन्य पकवान
लड्डू गोपाल की छठी के दिन उन्हें 56 भोग लगाए जाते हैं लेकिन कढ़ी-चावल का भोग अर्पित करने की विशेष प्रथा है। याद रखें कि लड्डू गोपाल को लगाए जाने वाले भोग की थाली में तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) रखना अत्यंत अनिवार्य और विशेष माना जाता है, क्योंकि इसके बिना भोग अधूरा रहता है।

Nyochhavar and Aarti नजर उतारना (न्योछावर) और दिव्य आरती
पूजा का विश्राम कान्हा की नजर उतारने की रस्म से किया जाता है। जिसे न्योछावर रस्म के नाम से भी जाना जाता है। लड्डू गोपाल की नजर उतारने के लिए कुछ पैसे लें और उन्हें उनके सिर के ऊपर से सात बार वारकर (न्योछावर करके) एक तरफ रख दें। बाद में इन पैसों को आप लड्डू गोपाल की सेवा से जुड़े कार्यों में ही इस्तेमाल कर सकते हैं। धूप-दीप जलाकर बाल गोपाल की आरती उतारें। पारंपरिक भजन और बधाई गीत गाकर कान्हा के जन्मोत्सव की खुशी मनाएं।
