सड़क से उठाकर महलों में पहुंचा देंगे शनि, बिना किसी खर्च के करें ये काम

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 21 Jun, 2022 08:02 AM

shani and astrology

समस्त प्राणियों के जीवन पर ब्रह्मांड में स्थित नवग्रहों का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव प्रतिकूल भी हो सकता है और अनुकूल भी। ग्रहों में अत्यधिक शुभ फल और अत्यधिक कष्ट देने के लिए शनि को जाना जाता है।

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What happens when your Shani is strong: समस्त प्राणियों के जीवन पर ब्रह्मांड में स्थित नवग्रहों का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव प्रतिकूल भी हो सकता है और अनुकूल भी। ग्रहों में अत्यधिक शुभ फल और अत्यधिक कष्ट देने के लिए शनि को जाना जाता है। शनि ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जो किसी भी व्यक्ति को सड़क से उठाकर महलों में पहुंचा देता है और किसी को भी महलों से उठाकर सड़क पर पहुंचा देता है। कहने का तात्पर्य यह है कि शनि देव को भाग्यविधाता कहा जाता है।

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What is Shani responsible for: जीवन में सभी को कम से कम एक बार तो शनि की कुदृष्टि का सामना करना ही पड़ता है। जातक समझ ही नहीं पाता कि उसके जीवन में अचानक इतने उलट-फेर कैसे हो रहे हैं इसीलिए शनि की प्रलयंकारी, भयानक दृष्टि से सभी मनुष्य तो मनुष्य, देवता तक भी घबराते हैं। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू एवं केतु इन ग्रहों को नवग्रह कहते हैं। जीवन का सम्पूर्ण सुख-दुख, लाभ-हानि और जय-पराजय आदि विषय इन नवग्रहों पर आधारित होते हैं।

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Three Phases of Shani तीन चरणों में प्रभाव
शनि अपना प्रभाव 3 चरणों में दिखाते हैं जो साढ़े 7 सप्ताह से साढ़े 7 वर्ष तक के समय के लिए होता है।

पहले चरण में जातक का संतुलन बिगड़ जाता है और वह निश्चय विचार में इधर-उधर भटक जाता है अर्थात उसके हर कार्य में, उसके विचारों में स्थिरता का अभाव होने लगता है और वह परेशानियों में घिरने लगता है।

दूसरे चरण में उसे कुछ मानसिक और शारीरिक रोग भी घेरने लगते हैं और उसका कष्ट और बढ़ जाता है।

तीसरे तथा अंतिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते जातक का मस्तिष्क ठीक काम नहीं करता तथा उसमें क्रोध की मात्रा और अधिक हो जाती है। इस समय कोई और ग्रह भी गलत स्थान पर चल रहा हो तो जातक के दुखों में बढ़ौतरी हो जाती है।

Shani dosh ka nivaran उपाय: शनि की शांति के लिए मृत्युंजय जप, नीलम  या फिरोजा धारण करना तथा तिल, उड़द, लोहा, तेल, काला वस्त्र, नीलम, कुलथी, काली गौ, काले पुष्प, कस्तूरी, स्वर्ण आदि का दान श्रेष्ठ माना जाता है परंतु अनुभव से देखा गया है कि शनि मंत्र के जप, स्रोत, स्तुति आदि के पाठ से जल्दी प्रसन्न होते हैं।

Shani daan: दान आदि अन्य उपाय कर पाना हर एक के बस का नहीं है परंतु मंत्र का जाप बिना किसी खर्च के स्वयं किया जा सकता है। मंत्र जाप तथा स्रोत आदि का पाठ 21 दिन में पूरा करना चाहिए और विधि अनुसार यज्ञ आदि करके दान-दक्षिणा देकर शनि देव से कामना करनी चाहिए कि वह जीवन में आई आपदाओं से हमारी रक्षा करें।  

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