गोवा में अवैध भूमि हस्तांतरण की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख कोई न्यायाधीश हों : तृणमूल

Edited By Updated: 24 Jun, 2022 08:49 PM

pti goa story

पणजी, 24 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को मांग की कि गोवा में अवैध भूमि हस्तांतरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) का प्रमुख किसी न्यायाधीश को बनाया जाना चाहिए।

पणजी, 24 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को मांग की कि गोवा में अवैध भूमि हस्तांतरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) का प्रमुख किसी न्यायाधीश को बनाया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने राज्य में अवैध भूमि हस्तांतरण की जांच के लिए एक पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है। ऐसे 50 से 60 मामलों में अब तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

तृणमूल की गोवा इकाई के प्रवक्ता टी. डीमेलो ने यहां संवाददाताओं से कहा कि एसआईटी में शामिल अधिकारियों की ईमानदारी को लेकर कोई संदेह नहीं है, लेकिन ‘‘पुलिस के प्रति लोगों की धारणा ठीक नहीं है।’’
तृणमूल नेता ने कहा कि अगर एसआईटी का नेतृत्व कोई पुलिस अधीक्षक करते हों तो ऐसे लोग फिर से मामले दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आएंगे, जिन्होंने वर्षों पहले धोखाधड़ी में अपनी जमीन खो दी थी और पुलिस के पास औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने किसी न्यायाधीश को जांच दल का प्रमुख बनाए जान की मांग की।
डीमेलो ने दावा किया कि मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मौजूदा सरकार के 22 अधिकारियों को एसआईटी में स्थानांतरित कर दिया है। उन्होंने कहा, “अनियमितताएं वर्तमान सरकार की नाक के नीचे हो रही थीं। यदि आप इसी व्यवस्था से कुछ अधिकारियों को चुनकर एसआईटी बनाते हैं तो इससे क्या फर्क पड़ेगा।”
उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि लोगों में भरोसा पैदा हो ताकि वे शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ सकें।

त्वरित जांच कराने के सावंत के आश्वासन पर तृणमूल प्रवक्ता ने कहा कि त्वरित जांच काफी नहीं है बल्कि इन सभी मामलों में इंसाफ शीघ्र मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एसआईटी पाती है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्रीनामा हुआ है तो रजिस्ट्रार को उसे रद्द करने का अधिकार दिया जाए।
इस बीच, राज्य के शहरी नियोजन मंत्री विश्वजीत राणे ने शुक्रवार को कहा कि जब से शिकायतें दर्ज कराने के लिए ई-मेल एड्रेस शुरू किया गया है तब से उनके विभाग को जमीन हथियाने की 61 शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ शासन पारदर्शी प्रक्रिया होनी चाहिए। लोगों को सुगमता एवं पारदर्शी प्रणाली प्रदान करना हर मंत्री का काम है ताकि उनकी शिकायतों का प्रभावी तरीके से निवारण हो। ’’



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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