Edited By Rohini Oberoi,Updated: 01 Apr, 2026 12:34 PM

अगर आप आने वाले दिनों में हवाई सफर की योजना बना रहे हैं तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई आग का सीधा असर अब भारतीय आसमान पर दिखने लगा है। 1 अप्रैल 2026 से विमान ईंधन (Aviation...
Jet Fuel Price Hike : अगर आप आने वाले दिनों में हवाई सफर की योजना बना रहे हैं तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई आग का सीधा असर अब भारतीय आसमान पर दिखने लगा है। 1 अप्रैल 2026 से विमान ईंधन (Aviation Turbine Fuel - ATF) की कीमतों में 115% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे हवाई टिकटों के दाम में भारी उछाल आना तय है।
इतिहास में पहली बार ₹2 लाख के पार
देश के उड्डयन इतिहास में यह पहला मौका है जब जेट फ्यूल की कीमत ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। राजधानी दिल्ली में ATF की कीमत अब ₹2,07,341 प्रति किलोलीटर पहुंच गई है। पिछले महीने यानी मार्च में यह कीमत महज ₹96,638 थी। यानी सिर्फ एक महीने में दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं।
क्यों लगी ईंधन की कीमतों में आग?
इस बेतहाशा बढ़ोतरी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव और युद्ध की स्थिति है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से इंटरनेशनल मार्केट में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन करीब 115% और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लगभग 107% महंगा हो गया है।
आम यात्रियों पर क्या होगा असर?
चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है इसलिए ईंधन महंगा होने का सीधा बोझ यात्रियों के कंधों पर डाला जाएगा।
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किराये पर कोई सीमा नहीं: केंद्र सरकार ने हाल ही में घरेलू हवाई टिकटों की कीमतों पर लगी ऊपरी सीमा (Price Cap) हटा दी है। इसका मतलब है कि अब एयरलाइन कंपनियां मांग और लागत के हिसाब से अपना किराया खुद तय कर सकेंगी।
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बढ़ सकते हैं दाम: जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में हवाई टिकटों की कीमतों में 30% से 50% तक की वृद्धि देखी जा सकती है।
सरकार की पैनी नजर
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर आम जनता का शोषण न करें। मंत्रालय ने साफ किया है कि यदि कंपनियां गलत तरीके से या बहुत ज्यादा किराया वसूलती हैं, तो सरकार जनहित में दोबारा 'प्राइस कैप' (किराया सीमा) लागू करने पर विचार कर सकती है।