हाथ में 'रामचरितमानस' और सामने पुलिस की लाठी! इस तस्वीर पर अखिलेश यादव ने BJP पर किया तीखा हमला

Edited By Updated: 18 May, 2026 12:11 PM

akhilesh launches scathing attack on bjp over action against lawyers in lucknow

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबर हटाए जाने के दौरान हुए हंगामे और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राज्य में सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर BJP की सरकार पर...

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वकीलों के चैंबर हटाए जाने के दौरान हुए हंगामे और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर राज्य में सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर BJP की सरकार पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने 'एक्स'पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें एक वकील हाथ में पवित्र ग्रंथ 'श्रीरामचरितमानस' दिख रही है और पुलिसकर्मी उस पर लाठी ताने खड़े हैं।

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भाजपाइयों का सिर्फ एक धर्म है और वो है पैसा

 सपा प्रमुख ने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए BJP को 'अधर्मी' करार दिया। उन्होंने लिखा "‘श्रीरामचरितमानस’ हमारी सौहार्दपूर्ण संस्कृति का संविधान है और मानवीय-व्यावहारिक मर्यादा का आचार संहिता कोश। उप्र भाजपा सरकार ने जिस तरह लखनऊ में ‘श्रीरामचरितमानस’ का अपमान-तिरस्कार किया है, वो किसी भी तरह क्षमा करने योग्य नहीं है।" अखिलेश यादव ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि BJP का सिर्फ एक ही धर्म है और वो पैसा है। वे प्रभु श्रीराम के सगे भी नहीं है। उन्होंने नारा देते हुए लिखा, "धर्म कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा! देश इस अधर्मी भाजपा को अब हमेशा के लिए हटा देगा।" इससे पहले उन्होंने घटना में घायल वकीलों के मुफ्त इलाज की भी मांग की थी।

क्या है पूरा मामला? 

जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरा  विवाद रविवार को लखनऊ के वजीरगंज इलाके में शुरू हुआ, जहां नगर निगम की टीम वकीलों के कथित 'अवैध चैंबर' गिराने पहुंची थी। इस कार्रवाई का अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध किया। यहां पर हालात कंट्रोल करने के लिए पुलिस बल का प्रयोग करना पड़ा। इस मामले पर पुलिस और प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक बयान जारी किया है। पुलिस प्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) के आदेशों का पालन करते हुए की गई थी। अदालत परिसर और उसके आस-पास से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य था। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अभियान के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने 'आवश्यक बल' का प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को हटाया, जिसके बाद अवैध निर्माण को शांतिपूर्वक ध्वस्त कर दिया गया।

 

 

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