सीट बंटवारे से ज्यादा महत्वपूर्ण गठबंधन की जीत, BJP को हराने के लिए सभी एकजुट हों : द्रमुक

Edited By Updated: 05 Oct, 2026 03:16 PM

all must unite to defeat the bjp says dmk

उन्होंने कहा, ''भाजपा सब कुछ कर रही है। वे मतदाताओं के नाम हटाना चाहते हैं। खासकर, वे विशेष गहन पुनरीक्षण का इस्तेमाल दूसरे धर्मों के लोगों के नाम हटाने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा को वोट नहीं देंगे।

चेन्नई : द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीटों के बंटवारे से अधिक महत्वपूर्ण गठबंधन की जीत है और सभी दलों को भाजपा को हराने के लिए एकजुट होना चाहिए। उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। 

गठबंधन को जीतना चाहिए

इस बीच, यादव ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने तथा लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा करने की होनी चाहिए। द्रमुक के प्रवक्ता टी. के. एस. इलनगोवन ने बातचीत में कहा कि द्रमुक सपा के रुख का समर्थन करती है। उन्होंने कहा, ''गठबंधन को जीतना चाहिए और भाजपा को हराना चाहिए। किसी एक पार्टी को दो-तीन सीट अधिक मिल जाना मुद्दा नहीं है। सभी को भाजपा को हराने के लिए एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।''

द्रमुक के वरिष्ठ नेता ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से कथित तौर पर हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इलनगोवन ने आरोप लगाया कि भाजपा कुछ खास समुदायों को निशाना बनाने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है। 

भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं

उन्होंने कहा, ''भाजपा सब कुछ कर रही है। वे मतदाताओं के नाम हटाना चाहते हैं। खासकर, वे विशेष गहन पुनरीक्षण का इस्तेमाल दूसरे धर्मों के लोगों के नाम हटाने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा को वोट नहीं देंगे। इसलिए भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।'' द्रमुक नेता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने अपनी निष्पक्षता खो दी है। उन्होंने कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को ''बहुत गंभीर अपराध'' बताते हुए दावा किया कि निर्वाचन आयोग अब स्वतंत्र निगरानी संस्था नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, ''निर्वाचन आयोग एक निष्पक्ष संस्था है। लेकिन ज्ञानेश कुमार के आने के बाद यह निष्पक्ष संस्था नहीं रह गई है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार केंद्र में सत्तारूढ़ दल के प्रभाव में काम कर रहे हैं। 

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