Edited By Tanuja,Updated: 03 Sep, 2026 07:30 PM

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने जन्माष्टमी कार्यक्रम में शेख हसीना का नाम लिए बिना उनके शासन की तुलना कंस से की। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ दशक तक लोगों को लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रखा गया। तारिक ने हिंदुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं...
Dhaka: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने जन्माष्टमी के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला। उन्होंने बांग्लादेश की पिछली सरकार की तुलना मथुरा के राजा कंस से करते हुए कहा कि कंस जैसा क्रूर शासन करीब डेढ़ दशक तक देश में चला और लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा गया। ढाका में आयोजित जन्माष्टमी समारोह में तारिक रहमान ने हिंदू समुदाय के लोगों और पुजारियों से मुलाकात की। उन्होंने देश और दुनिया भर के हिंदुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं। कार्यक्रम में भगवान कृष्ण के जन्म की कथा का उल्लेख करते हुए तारिक रहमान ने कहा कि करीब 5,000 साल पहले मथुरा में अत्याचारी राजा कंस का शासन था।
हिंदू मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने कंस का अंत कर बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की। इसके बाद उन्होंने इसी कथा को बांग्लादेश की राजनीति से जोड़ दिया। तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश में भी कंस जैसा शासक डेढ़ दशक तक सत्ता में रहा और लोगों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से दूर रखा। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग एकजुट हुए और उन्होंने 'कंस जैसे फासीवादी शासन' को सत्ता से हटाने के लिए बलिदान दिया। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने शेख हसीना का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। तारिक रहमान ने कहा कि वह बांग्लादेश और दुनिया भर के सभी हिंदुओं तथा सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम बांग्लादेश सरकार के धार्मिक मामलों के मंत्रालय और हिंदू धार्मिक कल्याण ट्रस्ट की ओर से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में तारिक रहमान विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने हिंदू पुजारियों से मुलाकात की और समुदाय के कुछ लोगों को सम्मान राशि भी वितरित की। तारिक रहमान ने दावा किया कि बांग्लादेश अब दोबारा लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश के सामने अब अर्थव्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष प्रशासन और कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि अब बांग्लादेश के पुनर्निर्माण का समय है। बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वह भारत आ गईं। उनकी सरकार के पतन के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।
बाद में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया गया। हसीना के भारत में रहने और वहां से दिए गए राजनीतिक बयानों के कारण ढाका और नई दिल्ली के संबंधों में भी तनाव देखने को मिला। इसके बाद बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में बीएनपी को बहुमत मिला और लंबे समय तक निर्वासन में रहने के बाद तारिक रहमान की सत्ता में वापसी हुई। सत्ता में लौटने के बाद बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में कई कानूनी मामले भी चल रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर तारिक रहमान का बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में शेख हसीना की राजनीतिक विरासत और उनके शासन को लेकर बहस अभी भी जारी है।