Edited By Ramkesh,Updated: 20 Jul, 2026 06:07 PM

बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सरकार का नेतृत्व करने का अवसर भले ही हाल में मिला हो, लेकिन बांकीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी का दबदबा कई दशकों से कायम है और वह यहां लगातार बड़े अंतर से जीत दर्ज करती रही है। इसी वजह से जब बांकीपुर से लगातार...
नेशनल डेस्क: बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सरकार का नेतृत्व करने का अवसर भले ही हाल में मिला हो, लेकिन बांकीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी का दबदबा कई दशकों से कायम है और वह यहां लगातार बड़े अंतर से जीत दर्ज करती रही है। इसी वजह से जब बांकीपुर से लगातार पांच बार विधायक रहे नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए तो 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव को पार्टी, खासकर हाल में राज्य की सत्ता की अगुवाई मिलने से उत्साहित है।
भाजपा को बांकीपुर में जीत का भरोसा
प्रदेश इकाई, आसान मुकाबला मान रही थी। इस सीट पर भाजपा के आत्मविश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने ऐसी सीट से, जिसे वह किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहेगी, अपने युवा मोर्चा के अपेक्षाकृत कम चर्चित नेता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के मजबूत संगठनात्मक तंत्र का साथ न होता तो अन्य दावेदार उन्हें शायद कमजोर उम्मीदवार मानते। भाजपा के इस आत्मविश्वास को सबसे बड़ी चुनौती जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से मिल रही है, जो पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी के खाता नहीं खोल पाने के बाद उसमें नयी ऊर्जा भरने की कोशिश में स्वयं मैदान में उतरे हैं। किशोर चुनाव प्रचार के दौरान लगातार कहते रहे हैं, ''बांकीपुर के चार लाख मतदाता सिर्फ एक विधायक नहीं चुनेंगे।
सम्राट चौधरी का दावा- जीतर तो सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा
अगर मैं जीतता हूं तो सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। विधानसभा के भीतर जन सुराज पार्टी का एकमात्र विधायक भी बाकी 242 विधायकों के संयुक्त प्रभाव से अधिक महत्व रखेगा।'' चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी जैसे नेताओं के साथ काम कर चुके हैं, 49 वर्षीय किशोर पिछले विधानसभा चुनाव में स्वयं मैदान में नहीं उतरे थे। माना जाता है कि उनके इस फैसले से 'राजनीतिक विकल्प' देने के उनके दावे को लेकर मतदाताओं में निराशा पैदा हुई थी।
राजद सत्ता में लौटी तो बिहार में फिर होगा 'जंगलराज'
बांकीपुर में प्रचार के दौरान वह मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह उपचुनाव ''बिहार की भाजपा नीत सरकार पर जनमत संग्रह है'' और इसके लिए वह राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों का सहारा ले रहे हैं। किशोर कहते हैं, ''जिन लोगों ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सत्ता में आने पर 'जंगलराज' लौटने के डर से भाजपा को वोट दिया था, उन्हें अब चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को विधानसभा में भारी बहुमत प्राप्त है। जन सुराज की जीत से सरकार नहीं बदलेगी।'' वहीं मुस्लिम मतदाताओं से वह कहते हैं, ''आप राजद को इसलिए वोट देते रहे कि भाजपा सत्ता से दूर रहे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बार बदलाव के लिए जन सुराज पार्टी को समर्थन दें।'' किशोर का एक और तर्क है, ''मुझे पता है कि यहां अधिकांश लोग सम्राट चौधरी से खुश नहीं हैं, लेकिन आप यह बात सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नहीं कह सकते। मुझे वोट दीजिए, संदेश उन तक पहुंच जाएगा।
जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर बीजेपी ने उतारा प्रत्याशी
गौरतलब है कि एक दशक से भी कम समय पहले भाजपा में शामिल हुए और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए शीर्ष नेतृत्व की पसंद माने जाने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर किशोर विधानसभा चुनाव के समय से ही हमलावर रहे हैं। वह विभिन्न चुनावी हलफनामों में मुख्यमंत्री की जन्मतिथि और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े कथित विरोधाभासों का मुद्दा उठाते रहे हैं। राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रह चुके चौधरी को किशोर कथित आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए 'जंगलराज का प्रतिनिधि' भी बताते रहे हैं। भोजपुर के भारत तिवारी मुठभेड़ मामले और हाल में पटना के निवासी बंटी यादव की हत्या जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरते हुए किशोर विभिन्न वर्गों के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बांकीपुर का मतदाता परंपरागत रूप से जातीय आधार पर मतदान करने वाला माना जाता है। हालांकि भाजपा भी पूरी सतर्कता से चुनाव लड़ रही है।
चारा घोटाले जैसे मामले को बीजेपी बना रही मुद्दा
अभिषेक कुमार 'बंटी' ने नामांकन दाखिल करने के अगले दिन पारिवारिक कारणों का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया। माना जाता है कि भाजपा नेतृत्व को देर से एहसास हुआ कि बंटी के माता-पिता का चारा घोटाले में आरोपी होना चुनाव में विपक्ष के लिए मुद्दा बन सकता है। नीरज कुमार सिन्हा ने कहा, ''पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है और मैं उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। बांकीपुर के मतदाताओं से आशीर्वाद चाहता हूं, जिन्होंने वर्षों से भाजपा का समर्थन किया है।'' सिन्हा भी नितिन नवीन की तरह कायस्थ समुदाय से आते हैं। राज्य में संख्या कम होने के बावजूद बांकीपुर जैसे शहरी क्षेत्र में इस समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है। इस विधानसभा क्षेत्र में करीब चार लाख मतदाता हैं। इस बीच, जन सुराज पार्टी के टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके कई नेता हाल के दिनों में भाजपा में शामिल हो गए हैं।
भाजपा ने 40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा
विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न क्षेत्रों की कई चर्चित हस्तियों को अपनी पार्टी से जोड़ने वाले किशोर अब मुख्य रूप से अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा उम्मीदवार के पीछे मजबूत चुनावी तंत्र है। नितिन नवीन हर बार पटना आने पर लोगों से कहते हैं कि राज्यसभा सदस्य बनने के बावजूद बांकीपुर उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा। भाजपा के 40 स्टार प्रचारकों की सूची में नितिन नवीन के अलावा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय, स्थानीय सांसद रविशंकर प्रसाद तथा गायक से नेता बने मनोज तिवारी, पवन सिंह और मैथिली ठाकुर भी शामिल हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में बांकीपुर से जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को कुल मतों का पांच प्रतिशत से भी कम समर्थन मिला था।
हालांकि इस बार स्वयं प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से भाजपा के भीतर भी यह माना जा रहा है कि वह प्रमुख चुनौती पेश कर सकते हैं। उपचुनाव में कुल 21 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं राजद की रेखा गुप्ता भी शामिल हैं। किशोर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जर्जर बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। हालांकि ये मुद्दे मतदाताओं के बीच चर्चा में हैं, लेकिन इस निर्वाचन क्षेत्र में, जहां मतदान प्रतिशत परंपरागत रूप से कम रहता है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता उस पार्टी के साथ बने रहें जिसे उन्होंने उसके सत्ता से बाहर रहने के दौरान भी समर्थन दिया था या फिर बदलाव के पक्ष में मतदान करें।