Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Oct, 2026 03:15 PM

दिल्ली में अब ई-रिक्शा संचालन को लेकर बड़े और कड़े नियम लागू करने की तैयारी चल रही है। दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली ई-रिक्शा (पंजीकरण और संचालन) योजना, 2026' का एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है।
नई दिल्ली: दिल्ली में अब ई-रिक्शा संचालन को लेकर बड़े और कड़े नियम लागू करने की तैयारी चल रही है। दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली ई-रिक्शा (पंजीकरण और संचालन) योजना, 2026' का एक नया ड्राफ्ट तैयार किया है।
दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा में यात्रियों की संख्या को अधिकतम 4 तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से एक ही ई-रिक्शा में सात से आठ स्कूली बच्चों को ले जाने की प्रथा पर असर पड़ सकता है। यह प्रस्ताव 'दिल्ली ई-रिक्शा (पंजीकरण और संचालन) योजना, 2026' के ड्राफ्ट का हिस्सा है।
सवारियों की संख्या और स्कूली बच्चों की सुरक्षा
इसका उद्देश्य यात्रियों की संख्या, ड्राइवर की योग्यता, वाहन की स्पीड, पंजीकरण और सुरक्षा मानकों को विनियमित करना है। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिनों के भीतर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ये प्रस्तावित नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार, एक ई-रिक्शा में ड्राइवर के अलावा अधिकतम चार यात्री ही बैठ सकेंगे। ड्राइवर के बगल में किसी यात्री को बिठाना या किसी को खड़े होकर यात्रा करने देना भी मना होगा। अगर यह नियम लागू होता है, तो ड्राइवरों, अभिभावकों और स्कूलों को बच्चों के आने-जाने की व्यवस्था पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। ड्राफ्ट में ई-रिक्शा की अधिकतम स्पीड 25 किमी प्रति घंटा और मोटर पावर को 2,000 वॉट तक सीमित करने का प्रस्ताव भी है।
लाइसेंस, PSV बैज और मालिकाना हक
प्रस्तावित योजना के तहत, ई-रिक्शा ड्राइवरों के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल (PSV) बैज होना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वाहन ऐसे ड्राइवर चलाएं जो तय योग्यता शर्तों को पूरा करते हों। ड्राफ्ट में दिल्ली में ई-रिक्शा की कुल संख्या को 2.5 लाख तक सीमित करने का प्रस्ताव भी है। कोई भी व्यक्ति अधिकतम 5 ई-रिक्शा का मालिक हो सकता है, जबकि पात्र संगठन 100 तक ई-रिक्शा रख सकते हैं। हर ई-रिक्शा के लिए एक डिजिटल 'ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट' (ECC) की जरूरत होगी, जिसकी वैधता दो साल होगी।
सर्टिफिकेट और 90 दिन का समय
मौजूदा ई-रिक्शा मालिकों को इस योजना के नोटिफिकेशन के बाद नए नियमों का पालन करने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा। ड्राफ्ट में यह प्रावधान भी शामिल है कि ई-रिक्शा में फर्स्ट-एड किट (प्राथमिक चिकित्सा किट) होनी चाहिए। साथ ही, बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के चढ़ने और उतरने के समय ड्राइवरों को उनकी मदद करनी होगी। महिला यात्रियों के साथ छेड़छाड़ या दुर्व्यवहार के मामलों में ड्राइवरों को पुलिस को सूचित करना होगा। प्रस्तावित नियमों के तहत, शराब के नशे में गाड़ी चलाना और ऐसा ऑडियो बजाना जिससे ड्राइवर का ध्यान भटके, प्रतिबंधित होगा।
यात्रियों की सुरक्षा और जरूरी सहूलियतें
ई-रिक्शा को उन सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं होगी जिन्हें प्रतिबंधित घोषित किया गया है। अगर पार्किंग की वजह से ट्रैफिक या पैदल चलने वालों को परेशानी होती है, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस योजना में यह भी प्रस्ताव है कि वाहन मालिकों को अपने ई-रिक्शा पर अपना नाम, पता और फोन नंबर प्रदर्शित करना होगा। इस ड्राफ्ट में बिना जरूरी रजिस्ट्रेशन या मंजूरी के चलने वाले वाहनों को जब्त करने और कुछ खास परिस्थितियों में उन्हें नष्ट करने या निपटाने का प्रावधान है। इसमें अधिकृत रीसाइकलर्स के जरिए बैटरी को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने या ठिकाने लगाने पर भी जोर दिया गया है।
दिल्ली सरकार ने आम जनता और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। फीडबैक पर विचार करने के बाद इन नियमों में बदलाव किया जा सकता है। सरकार की अंतिम अधिसूचना में यह स्पष्ट किया जाएगा कि ओवरलोडिंग (क्षमता से अधिक यात्री बैठाने) पर क्या जुर्माना लगेगा, किन परिस्थितियों में ई-रिक्शा को जब्त किया जा सकता है, और अन्य नियमों के उल्लंघन पर क्या परिणाम होंगे।