Edited By Sahil Kumar,Updated: 21 Oct, 2026 05:04 PM

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंचने पर बुधवार को चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रेप) के तहत पहले चरण के प्रतिबंध लागू कर दिये हैं।
नई दिल्लीः वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में पहुंचने पर बुधवार को चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रेप) के तहत पहले चरण के प्रतिबंध लागू कर दिये हैं। सीएक्यूएम ने एक बयान में कहा, ''दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 20 अक्टूबर को 179 (मध्यम श्रेणी) दर्ज किया गया था, जिसमें तेज उछाल देखा गया और यह 21 अक्टूबर को अपराह्न दो बजे 244 (खराब श्रेणी) पर पहुंच गया।''
बयान में कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में एक्यूआई के 'खराब' श्रेणी में ही बने रहने के आसार हैं। ग्रेप के पहले चरण के तहत कई तरह के प्रतिबंध लागू हो जाते हैं।
इसके तहत होटल, रेस्तरां और खुले ढाबों के तंदूर में ईंधन के तौर पर कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाती है। इसके अलावा डीजल जनरेटर के इस्तेमाल की अनुमति केवल आपातकालीन या आवश्यक परिस्थितियों में ही दी जाती है। ग्रेप आपातकालीन उपायों की एक ऐसी व्यवस्था है, जो वायु गुणवत्ता के एक निश्चित स्तर से नीचे गिरने पर उसे और खराब होने से रोकने के लिए लागू की जाती है।
पहला चरण (ग्रेप-1) तब लागू होता है जब एक्यूआई 201 से 300 के बीच होता है। दूसरा चरण (ग्रेप-2) एक्यूआई 301 से 400 के बीच होने पर लागू किया जाता है। तीसरा चरण (ग्रेप-3) 401 से 450 के बीच और चौथा चरण (ग्रेप-4) एक्यूआई 450 से अधिक होने पर लागू होता है।