मोदी सरकार ने परिसीमन को राजनीतिक हथियार बनाया, विधेयक महिला और संविधान विरोधी: गौरव गोगोई

Edited By Updated: 16 Apr, 2026 03:35 PM

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लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को महिलाओं, जाति जनगणना, संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार परिसीमन को राजनीतिक...

नेशनल डेस्क: लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को महिलाओं, जाति जनगणना, संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार परिसीमन को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि सरकार को लोकसभा के वर्तमान संख्याबल 543 के आधार पर 2029 से ही महिला आरक्षण लागू करना चाहिए।

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गोगोई ने कहा कि सोनिया गांधी ने पिछली लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर चर्चा के दौरान यही कहा था कि महिला आरक्षण लागू हो, लेकिन इसे परिसीमन के साथ मत जोड़िए, लेकिन सरकार ने उस वक्त विपक्ष को नहीं सुना। उन्होंने कहा कि तीन साल में ऐसा क्या बदलाव हुआ कि सरकार का रुख बदल गया। गोगोई ने कहा, ''गृह मंत्री ने 2023 में आश्चासन दिया था कि जनगणना होगी, परिसीमन होगा, महिला आरक्षण लागू होगा। अब कह रहे हैं कि जनगणना और परिसीमन होगा।'' उन्होंने दावा किया कि लगता है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने में विलंब करना चाहती है। कांग्रेस सांसद ने कहा, ''हम आज भी कह रहे हैं कि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ मत जोड़िए। 543 सीटों पर ही 2029 में लागू करिए।''

उन्होंने कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं है, यह पर्दे के पीछे परिसीमन कराने की राजनीतिक मंशा है। गोगोई का कहना था, ''अगर सरकार महिला आरक्षण के पक्ष में होती तो इसे तत्काल लागू करती।'' उन्होंने दावा किया कि सरकार को मजबूर होकर जाति जनगणना करानी पड़ी। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि सरकार ने कैसे निर्धारित किया कि लोकसभा सदस्यों की संख्या 815 करनी है? गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन को राजनीति हथियार के रूप में इस्तेमाल करनी चाहती है।

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उन्होंने कहा, ''हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने परिसीमन की व्यवस्था राजनीतिक हथियार के लिए नहीं की थी लेकिन यह सरकार परिसीमन को निम्न स्तर की राजनीति के लिए इस्तेमाल कर रही है।'' गोगोई ने जम्मू-कश्मीर और असम में पिछले कुछ वर्षों में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के लिए परिसीमन नागरिकों को सुविधा देने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता और राजनीतिक जड़ों को मजबूत करने के लिए है। उनका कहना था, ''असम में एक लोकसभा का क्षेत्र 16 लाख तो एक 26 लाख की आबादी का है। यह किस की सुविधा के लिए किया गया है?''

उन्होंने दावा किया कि जो जम्मू-कश्मीर और असम में किया गया, वही देश में महिला आरक्षण के नाम पर करने का प्रयास हो रहा है। गोगोई ने कहा, ''यह शर्मनाक और दुखद है कि महिला आरक्षण का दुरुपयोग किया जा रहा है।'' कांग्रेस ने कहा, ''यह शंका है कि आप महिला आरक्षण और जाति जनगणना के पक्ष में नहीं हो, आप संविधान को कमजोर कर रहे हैं।'' उन्होंने दावा किया, ''विधेयक महिला विरोधी, जाति जनगणना विरोधी, संविधान विरोधी है तथा संघीय ढांचे के खिलाफ है।'' गोगोई ने कहा, ''हम महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं। लेकिन परिसीमन से मुक्त करिए। महिला आरक्षण पर राजनीतिक रोटियां मत सेंकिये।'' उनका कहना था कि राजनीतिक लाभ के लिए देश में राजनीतिक संतुलन के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।

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