भूख से मौत मामला: बच्चियां छोड़ गईं कई सवाल

Edited By Anil dev,Updated: 27 Jul, 2018 10:52 AM

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मंडावली गांव के पंडित चौक के पास एक मकान में तीन बच्चियों की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाबों की तलाश अभी तक दिल्ली पुलिस व संबंधित विभाग अभी तक नहीं कर पाए हैं। तीनों बच्चियों की भूख से एक साथ मौत होना इस पूरे मामले में...

पूर्वी दिल्ली (पंकज वशिष्ठ): मंडावली गांव के पंडित चौक के पास एक मकान में तीन बच्चियों की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाबों की तलाश अभी तक दिल्ली पुलिस व संबंधित विभाग अभी तक नहीं कर पाए हैं। तीनों बच्चियों की भूख से एक साथ मौत होना इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि तीनों बच्चियों की मौत भूख से हुई हो, लेकिन सवाल यह भी है कि एक साथ तीनों बच्चियों की भूख से मौत कैसे हो सकती है? तीनों बच्चियों के मां-बाप दोनों मानसिक रूप से कमजोर हैं। जिसके चलते मां पुलिस व संबंधित विभागों के अधिकारियों को जानकारी देने में अस्मर्थ है। 

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आखिर कहां है बच्चियों का पिता
घटना के बाद से ही पिता मंगल का घर से गायब होना, घर न लौटना। लापता होना पुलिस के लिए बड़ी सरदर्दी बना हुआ है। आखिर घर से काम के लिए निकला मंगल गया कहां। क्या उसे यह नहीं पता कि उसके बच्चे घर में भूखे और बीमार हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं मंगल ने भी भुखमरी व गरीबी से तंग आकर खुदकुशी जैसा कदम तो नहीं उठा लिया? मंगल उसी दिन से लापता है जब से वह अपने दोस्त नारायण के घर में शिफ्ट हुआ था। रिक्शा चोरी हो जाने के बाद मकान मालिक द्वारा अपना घर खाली कराने के बाद दो दिन पूर्व ही अपने दोस्त कें घर शिफ्ट होने के बाद काम की तलाश में गया मंगल आखिर लौटा क्यों नहीं। 

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दो दिन तक कमरे से नहीं निकला कोई
मकान की मालकिन सुदेश ने बताया कि मंगल, उसकी पत्नी और तीनों बच्चियां वहां रहने के लिए आए थे तो तीनों बच्चियां बीमार थीं। मंगलवार को नारायण दोपहर 12 बजे वहां आया तो देखा की मंगल की पत्नी कमरे में सो रही थी और तीनों बच्चियां बेसुध पड़ी हुई हैं। इसके बाद नारायण मकान मालकिन स्वदेश के साथ तीनों बच्चियों को लेकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। 

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पड़ोसियों को नहीं पता था बच्चियां व मां भूखी हैं
मंगल जिस दोस्त नारायण के घर के कमरे में शिफ्ट हुआ था उसका व आसपास के लोगों का कहना है कि दो दिन पहले ही यहां आए इस परिवार के बारे में लोगों को ज्यादा पता नहीं था। उन्हें यह भी नहीं पता था कि बच्चियां व उनकी क्या पड़ोसियों को नहीं पता था कि बच्चियां भूखी हैं और उनकी तबियत खराब है। पास में ही रहने वाले असलम का कहना था कि अगर पता होता तो खाना खिलाने की जिम्मदारी सभी मिल कर उठा लेते। मंगल के कमरे से जप्त किए सामान से पुलिस को कुछ दवाइंयां मिली हैं। जिन्हे फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए भेज दिया है। इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के तहत यदि ऐसे किसी भी बच्चे के बारे में जानकारी मिलती है तो बाल कल्याण समिति के समक्ष उसे पेश कर उसके पालन पोषण की व्यवस्था की जाती है। हर जिले में चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी होती है जो बच्चों की पढ़ाई, पोषण और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखती है, वो क्या कर रही हैं?  

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