अब इन गाड़ियों को नहीं मिलेगा पेट्रोल, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

Edited By Updated: 05 Aug, 2026 05:14 AM

these vehicles will no longer get petrol supreme court directs

सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को एक ऐसी प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू करने का निर्देश दिया है...

नेशनल डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को एक ऐसी प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत यदि किसी वाहन का वैध 'थर्ड पार्टी' बीमा नहीं है, तो उसे पेट्रोल पंपों पर ईंधन (पेट्रोल/डीजल) देने से इनकार किया जा सकता है।

बीमा की स्थिति से जुड़ेगा ईंधन
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट किया कि भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) और सड़क परिवहन मंत्रालय मिलकर इस योजना को तैयार करें। इस व्यवस्था के तहत, पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले वाहन के बीमा की स्थिति जांची जाएगी और वैध बीमा न होने पर ईंधन तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक मालिक बीमा नहीं करा लेता। अदालत का मानना है कि इससे बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान होगी और लोग बीमा कराने के लिए प्रेरित होंगे।

56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के, कोर्ट ने जताई चिंता
शीर्ष अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सड़कों पर चल रहे लगभग 56 प्रतिशत वाहन (करीब 16.54 करोड़) बिना बीमा के हैं। अदालत ने कहा कि इसका सबसे बुरा असर दुर्घटना पीड़ितों पर पड़ता है, जिन्हें मुआवजा मिलने में या तो बहुत देरी होती है या वे इससे वंचित रह जाते हैं।

नए वाहनों के लिए बीमा अवधि बढ़ी
अदालत ने सड़क सुरक्षा को देखते हुए नए वाहनों के लिए अनिवार्य 'थर्ड पार्टी' बीमा की अवधि को एक साल और बढ़ा दिया है:

  • नए चार पहिया वाहन: अब 3 साल के बजाय 4 साल का बीमा अनिवार्य होगा।
  • नए दो पहिया वाहन: अब 5 साल के बजाय 6 साल का बीमा लेना होगा।

तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए एएनपीआर (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) कैमरों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य पुलिस को 'बीमा सूचना ब्यूरो' और 'वाहन' पोर्टल से जुड़े हैंडहेल्ड उपकरण या ऐप दिए जाएंगे, जिससे वे मौके पर ही बीमा की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगे और उल्लंघन होने पर स्वतः ई-चालान जारी हो सकेंगे।

अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल मुआवजा दिलाना ही नहीं, बल्कि पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना भी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

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