क्या भारत में खत्म होगी फ्री UPI सेवा? 2,000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर लग सकता है शुल्क

Edited By Updated: 04 Aug, 2026 11:21 PM

big change on digital payments

भारत की मुफ्त यूपीआई (UPI) भुगतान प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने संसद में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट' (Payment and Settlement Systems Act) में संशोधन के लिए प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य...

बिजनेस डेस्कः भारत की मुफ्त यूपीआई (UPI) भुगतान प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने संसद में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट' (Payment and Settlement Systems Act) में संशोधन के लिए प्रस्ताव पेश किया है, जिससे भविष्य में चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क (Merchant Charges) लगाने का रास्ता साफ हो सकता है।

किसे देना होगा शुल्क और कितना?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस संशोधन के तहत फिलहाल कोई तत्काल शुल्क लागू नहीं किया गया है, बल्कि एक कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। चर्चा के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत तक का 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) लगाया जा सकता है।

आम जनता और छोटे व्यापारियों पर क्या होगा असर?
राहत की बात यह है कि इस शुल्क का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना नहीं है। यह शुल्क केवल उन व्यापारियों पर लागू होने की उम्मीद है जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। इसका मतलब है कि आपके पास की छोटी दुकानों और छोटे कारोबारियों के लिए यूपीआई लेनदेन पहले की तरह ही मुफ्त बना रहेगा,।

क्यों पड़ रही है शुल्क की जरूरत?
पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी शुल्क के यूपीआई सेवाएं देना लंबे समय के लिए टिकाऊ नहीं है। मर्चेंट शुल्क न होने के कारण कंपनियों के लिए नई तकनीक में निवेश करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

बड़े लेनदेन से करोड़ों की कमाई की उम्मीद
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के महीने में यूपीआई के जरिए 29.9 ट्रिलियन रुपये मूल्य के 23.6 बिलियन लेनदेन हुए। हालांकि 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन कुल संख्या का केवल 4 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल मूल्य (Value) में इनकी हिस्सेदारी 67 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सेगमेंट पर शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान उद्योग को सालाना 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है।

फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक कानूनी प्रावधान है। जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक यूपीआई भुगतान मौजूदा व्यवस्था के तहत पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा। सरकार अभी इस बात पर विचार कर रही है कि शुल्क की दर क्या हो और इसे किन लेनदेन पर लागू किया जाए।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!