Edited By Tanuja,Updated: 26 Sep, 2026 11:18 AM

संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा कश्मीर और 2025 के भारत-पाक संघर्ष का मुद्दा उठाने के बाद भारत ने जवाब दिया। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, दोहरे रवैये और भ्रामक दावों का आरोप लगाया तथा...
Washington: संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत को घेरने की पाकिस्तान की कोशिश पर भारत ने जवाब के अधिकार के तहत तीखा पलटवार किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, दोहरे रवैये और भ्रामक दावों को लेकर निशाना साधा। भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के दावों को उसके वास्तविक हालात के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित ‘समय पर हस्तक्षेप’ को संघर्ष रोकने का श्रेय दिया। शरीफ ने कहा कि दक्षिण एशिया में भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत समाधान जरूरी है। भारत ने उनके भाषण के बाद पाकिस्तान के दावों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के शासन और उसकी नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसके प्रतिनिधियों की ओर से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर दिए गए भाषण और पाकिस्तान के जमीनी हालात में अंतर है। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रभाव की ओर संकेत करते हुए कहा कि सत्ता में मौजूद लोग बदल सकते हैं, लेकिन वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए। गहलोत ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया। भारत ने कहा कि इस संशोधन और सैन्य नेतृत्व को मिली कानूनी सुरक्षा को पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के बारे में उसके प्रतिनिधियों के दावों को उसके वास्तविक स्वरूप से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए और “साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता।” भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही नीति का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों के परिणाम होंगे।
गहलोत ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा और पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने पर उसके परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उन व्यवस्थाओं और संबंधों पर सवाल उठ सकते हैं, जो आपसी मित्रता और सद्भावना के आधार पर बनाए गए हैं।भारत की यह स्थिति संयुक्त राष्ट्र में पहले भी रखी जाती रही है। जनवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में भी भारतीय प्रतिनिधि ने आतंकवाद को सामान्य बनाने के प्रयासों पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के रिकॉर्ड को लेकर 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों का भी संदर्भ दिया। गहलोत ने कहा कि अगर कश्मीर की बात करनी है तो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोगों की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से रावलाकोट का उल्लेख करते हुए वहां लोगों के सामने आए विरोध प्रदर्शनों और कथित हिंसा का मुद्दा उठाया।भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।