Edited By Tanuja,Updated: 22 Sep, 2026 11:57 AM

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और वैश्विक सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यूरोपीय संघ और V4 देशों के साथ व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा और नवोन्मेष पर सहयोग बढ़ाने...
New York: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया। उन्होंने बहुपक्षवाद पर पहले शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव के बीच अधिक भागीदारी, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की जरूरत पर जोर दिया। इसी दौरान यूरोपीय संघ के समकक्षों तथा मध्य यूरोप के चार देशों के विसेग्राद समूह के साथ बैठकों में भारत-यूरोप सहयोग, व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक संकटों पर चर्चा हुई।
UN में बहुपक्षवाद पर जोर
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यवस्था इस समय दबाव में है और तीव्र प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव तथा संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद को प्रभावी बनाने के लिए अधिक भागीदारी वाली विचार-विमर्श प्रक्रिया और पारदर्शी निर्णय व्यवस्था जरूरी है। जयशंकर ने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, आतंकवाद से मुकाबले, जलवायु कार्रवाई, उभरती प्रौद्योगिकियों, विकास वित्त, आपदा प्रबंधन और महामारी की तैयारी जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पालन बहुपक्षवाद को मजबूती देने की बुनियाद है। सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, केन्याई राष्ट्रपति विलियम रूटो, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली और अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
V4 देशों के साथ भारत का नया सहयोग
इसके साथ ही भारत और मध्य यूरोप के चार देशों-चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया-के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई। जयशंकर ने इसे ‘नया ऐतिहासिक अवसर’ बताया। बैठक में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष, अंतरिक्ष, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।भारत और V4 देशों ने विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक तथा वार्षिक व्यापार मंच शुरू करने पर सहमति जताई। रक्षा सहयोग को फिर से सक्रिय करने के साथ तकनीक, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम समेत प्रमुख वैश्विक मुद्दे भी बैठक के एजेंडे में रहे।
यूरोपीय संघ के साथ भी अहम बातचीत
जयशंकर ने यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की। बातचीत में भारत-ईयू सहयोग, बहुपक्षीय मुद्दों तथा खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन और हिंद-प्रशांत से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोपीय देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा हो रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में इसे आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। इससे पहले उन्होंने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी मुलाकात की और कहा कि भारत नाउरू के विकास में साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा। कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जयशंकर की बैठकों में बहुपक्षवाद, यूरोप के साथ रणनीतिक और आर्थिक सहयोग, रक्षा एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा यूक्रेन और खाड़ी जैसे वैश्विक संकट प्रमुख केंद्र में रहे।