मणिपुर हिंसा पर खरगे का केंद्र पर हमला, बोले- BJP की राजनीतिक सुविधा के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं

Edited By Updated: 21 Oct, 2026 02:09 PM

kharge says security will not be compromised for the bjp political convenience

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर में हिंसा को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ''राजनीतिक सुविधा'' के लिए बंधक नहीं...

नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर में हिंसा को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ''राजनीतिक सुविधा'' के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।

खरगे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में मणिपुर में हालिया हिंसा में चार नागरिकों की मौत की निंदा की और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि पू्र्वोत्तर के इस राज्य में मई, 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद से 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 24,530 लोग आज भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं, बच्चे और कमजोर परिवार इस लंबे समय से जारी संकट का सबसे अधिक खामियाजा भुगत रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से राज्य में शांति कायम नहीं हो सकी। कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने और फिर मुख्यमंत्री बदले जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कदमों के बावजूद मणिपुर में शांति नहीं लौट सकी है।

खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि हिंसा शुरू होने के बाद उन्होंने करीब 29 महीने तक मणिपुर का दौरा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद में दिए गए अपने आश्वासन को पूरा करने में विफल रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि जून, 2023 में शाह द्वारा गठित शांति समिति का क्या हुआ और राज्य में शांति बहाल करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं?

खरगे ने उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई का भी ब्योरा मांगा। उन्होंने कहा कि हजारों लोग अब भी विस्थापित हैं और उच्चतम न्यायालय ने राहत शिविरों में 31 अस्वभाविक मौत का उल्लेख किया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि तीन साल से अधिक समय बीतने, 300 से अधिक लोगों की मौत, राष्ट्रपति शासन और मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद ''इस घोर प्रशासनिक विफलता'' की जिम्मेदारी कौन लेगा? खरगे ने कहा, ''मणिपुर न्याय, गरिमा, संवैधानिक अधिकार और स्थायी शांति का हकदार है।'' उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को भाजपा की ''राजनीतिक सुविधा'' के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता। 

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