Edited By Anu Malhotra,Updated: 09 Jul, 2026 02:20 PM

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का ऐलान किया। इस कमेटी में कुल सात सदस्य होंगे, जिनमें सुप्रीम...
पुणे: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का ऐलान किया। इस कमेटी में कुल सात सदस्य होंगे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के तीन पूर्व जज, एक संवैधानिक विशेषज्ञ, एक पूर्व नौकरशाह और सामाजिक क्षेत्र से दो लोग शामिल होंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने आज महाराष्ट्र विधानसभा में यह घोषणा की।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरसी चव्हाण, हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसजी मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, महाराष्ट्र के पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मश्री रमेश पतंगे और शिक्षाविद सुवर्णा रावल मुख्य सदस्य होंगे। CM फडणवीस ने कहा कि सात सदस्यों वाली यह कमेटी यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करेगी और अगले छह महीनों के भीतर राज्य सरकार को अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट फाइनल करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागपुर में होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र में विधानसभा और विधान परिषद दोनों में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश करने और उसे पास कराने की कोशिश करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सभी जरूरी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आगे बढ़ेगी, ताकि राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
इससे पहले पिछले हफ्ते, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो भारत में पर्सनल लॉ और कानूनी एकरूपता पर चल रही बहस में एक अहम घटनाक्रम है।
इस मुद्दे पर बात करते हुए, फडणवीस ने कहा कि सरकार इस कानून को लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का विचार संविधान में शामिल 'राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों' (Directive Principles of State Policy) से समर्थन पाता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के विज़न का ज़िक्र करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि एक समान नागरिक ढांचा शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समानता और एकरूपता के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूरे देश में UCC पर चर्चा तेज़ हो गई है। आज़ादी के बाद उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला पहला राज्य बना, और उम्मीद है कि महाराष्ट्र अपना ड्राफ़्ट तैयार करते समय उत्तराखंड के अनुभव का बारीकी से अध्ययन करेगा। इस बीच, मई में असम ने अपना UCC बिल पास किया, जिसका मकसद धर्म से परे शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को नियंत्रित करने के लिए एक ही नागरिक कानूनी ढांचा बनाना है।