शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दुकान से खरीदी गई मूंगफली लेने की तरह, देश में तानाशाही शासन : सामना

Edited By Anu Malhotra,Updated: 20 Feb, 2023 05:00 PM

shiv sena s name and election symbol is like taking store bought peanuts

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले पार्टी के खेमे को ‘शिवसेना' नाम तथा ‘धनुष बाण' चुनाव चिह्न आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को सोमवार को ‘संपत्ति का सौदा' करार दिया। शिवसेना (यूबीटी) के...

मुंबई:  शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले पार्टी के खेमे को ‘शिवसेना' नाम तथा ‘धनुष बाण' चुनाव चिह्न आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को सोमवार को ‘संपत्ति का सौदा' करार दिया। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना' के संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि यह बात अब छिपी नहीं रह गई है कि शिवसेना नाम और उसका चुनाव चिह्न किसी दुकान से मूंगफली लेने की तरह खरीदे गये हैं।

 उद्धव नीत खेमे को दिय़ा ‘जलती मशाल' चुनाव चिह्न 
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को शिंदे की अगुवाई वाले धड़े को असली शिवसेना की मान्यता दी और उसे ‘धनुष बाण' चुनाव चिह्न आवंटित किये जाने का आदेश भी दिया। इससे उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है जिनके पिता बालासाहेब ठाकरे ने 1966 में पार्टी की स्थापना की थी। आयोग ने उद्धव नीत खेमे को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नाम तथा ‘जलती मशाल' चुनाव चिह्न रखने की अनुमति दी। मराठी अखबार ‘सामना' ने लिखा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने पूरे मुद्दे को संपत्ति के सौदे की तरह लिया और ठाकरे द्वारा स्थापित, पोषित शिवसेना को दिल्ली के तलवे चाटने वालों के हाथों सौंप दिया।

 ‘धनुष बाण' चुनाच चिह्न अमित शाह की मेहरबानी से मिला 
पार्टी ने दावा किया कि यह बात भी अब छिपी नहीं रह गयी है कि ‘धनुष बाण' चुनाच चिह्न भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मेहरबानी से मिला है। यह आदमी महाराष्ट्र और मराठी जनता का एक नंबर का शत्रु है।  संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत के इस दावे को भी दोहराया गया है कि मौजूदा सरकार (शिंदे-फडणवीस) बनाने और निर्वाचन आयोग से अनुकूल फैसला प्राप्त करने के लिए 2 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये। 

आजादी के 75 साल बर्बाद, देश में तानाशाही का शासन शुरू 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘सामना' ने लिखा  कि प्रधानमंत्री को अब लाल किले से ऐलान कर देना चाहिए कि उन्होंने आजादी के 75 साल बर्बाद कर दिये और देश में तानाशाही का शासन शुरू हो गया है। न्यायपालिका, संसद, समाचार मीडिया और निर्वाचन आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाएं अब हमारे गुलाम के तौर पर काम करेंगी।  भाजपा नीत केंद्र पर निशाना साधते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि आजादी के लिए आवाज उठाने वालों को राष्ट्रविरोधी कहा जाएगा और फांसी पर लटका दिया जाएगा। महाराष्ट्र पर हमला देश के लोकतंत्र पर हमला है। इतिहास में इससे पहले कभी सत्ता का इस तरह दुरुपयोग नहीं किया गया।

उसने कहा कि निर्वाचन आयोग को शिंदे खेमे की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पूरी होने तक का इंतजार करना चाहिए था। ‘सामना' के मुताबिक, मुमकिन है कि कल कोई अडाणी, अंबानी या नीरव मोदी सारे विधायकों और सांसदों को खरीदकर पूरी पार्टी, सरकार पर अपना मालिकाना हक जताएगा। संपादकीय में कहा गया है कि बड़ी संख्या में शिवसेना (यूबीटी) समर्थकों ने निर्वाचन आयोग को ठाकरे के समर्थन में शपथपत्र भेजे थे, उनका कोई महत्व है या नहीं? 

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