Edited By Ramkesh,Updated: 25 Sep, 2026 07:58 PM

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 11 मार्च के अपने उस फैसले को भविष्य के प्रभाव से लागू करने की केंद्र सरकार की याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि किसी पीएसयू या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता या पिता के वेतन या आय को...
दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 11 मार्च के अपने उस फैसले को भविष्य के प्रभाव से लागू करने की केंद्र सरकार की याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि किसी पीएसयू या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता या पिता के वेतन या आय को अकेले ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 'क्रीमी लेयर' से बाहर रखने का आधार नहीं माना जा सकता।
नए कानून को लागू करने से चालू भर्ती प्रक्रियाओं में होगी रुकावट
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि फैसले को भावी प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने अदालत के तय किए गए कानून को लागू करने और पुरानी व चालू भर्ती प्रक्रियाओं में रुकावट को रोकने के लिए दो साल का समय मांगा। शीर्ष अदालत ने विधि अधिकारी की इस बात का संज्ञान लिया कि अलग-अलग उच्च न्यायालयों ने इस फैसले से जुड़ी याचिकाओं पर विचार किया है।
माता-पिता के पद और श्रेणी, साथ ही संपत्ति आकलन
भाटी ने कहा कि केंद्र ने अलग-अलग उच्च न्यायालयों से मामलों को उच्चतम न्यायालय या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की है। भारत सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में, उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को फैसला सुनाया था कि किसी विद्यार्थी के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत पिता या माता के वेतन या आय को अकेले ही 'क्रीमी लेयर' से बाहर रखने का आधार नहीं माना जा सकता। माता-पिता के पद का स्तर और श्रेणी, साथ ही तय आय या संपत्ति आकलन को 1993 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार देखा जाना था।
भारत सरकार बनाम रोहित नाथन क्या था पूरा मामला?
रोहित नाथन ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2012 में OBC श्रेणी से ऑल इंडिया रैंक 174 हासिल की थी। उनके पिता निजी कंपनी HCL Technologies में काम करते थे और उनकी आय उस समय लागू क्रीमी लेयर आय सीमा से अधिक थी। इसी आधार पर रोहित को OBC आरक्षण का लाभ देने पर विवाद हुआ। मुख्य सवाल यह था कि क्या माता-पिता की केवल सैलरी/आय अधिक होने के आधार पर उनके बच्चे को OBC क्रीमी लेयर में डालकर आरक्षण से बाहर किया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
11 मार्च 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PSU या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी को अकेले क्रीमी लेयर तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। माता-पिता के पद/स्टेटस और अन्य निर्धारित मानदंडों को भी देखा जाना चाहिए।
अब 2026 में विवाद क्यों?
फैसले को लागू करने को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार का कहना है कि फैसले को लागू करने से पहले से चल रही भर्ती और खासकर UPSC Civil Services Examination 2025 के चयन, कैडर आवंटन और नियुक्ति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। केंद्र ने फैसले के अनुपालन के लिए दो साल का समय मांगा है।