'मिस्त्री ने ट्रस्ट का भरोसा खो दिया': टाटा संस

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Friday, October 28, 2016-1:11 PM

नई दिल्लीः टाटा के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को बर्खास्त करने के बाद अभी भी चर्चा की जा रही है कि आखिर किस आधार पर टाटा सन्स के बोर्ड ने यह फैसला लिया। हालांकि, रतन टाटा के नजदीकी लोगों का मानना है कि मिस्त्री ट्रस्ट का भरोसा खो चुके थे। मिस्त्री को हटाने का फैसला ट्रस्ट द्वारा लिया गया था, रतन टाटा टाटा सन्स की इसमें 66 पर्सेंट हिस्सेदारी के साथ इसके लाइफटाइम चेयरमैन हैं। ट्रस्ट की 18.5 पर्सेंट हिस्सेदारी कंस्ट्रक्शन टाइकून पालोन्जी मिस्त्री के पास है।

सायरस मिस्त्री को निकालने के कारणः
1. टाटा संस के एक बयान के मुताबिक़ मिस्त्री के कामकाज करने का तरीका टाटा ग्रुप के काम करने के परंपरागत तरीके से मेल नहीं खा रहा था और इसी वजह से बोर्ड के सदस्यों का मिस्त्री पर से भरोसा उठ गया।

2. माना जा रहा है कि अपने कार्यकाल में सायरस मिस्त्री ने आर्थिक नुकसान का सामना कर रही टाटा ग्रुप की हॉस्टपिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत चल रहे होटलों में हिस्सेदारी कम की और उन्हें बेच दिया। इससे टाटा ग्रुप में नाराज़गी थी।

3. मिस्त्री की अागुवाई में ताज बॉस्टन होटल, ब्लू सिडनी होटल को बेच दिया गया। अपने पत्र में मिस्त्री ने कहा था कि न्यूयॉर्क के मशहूर पियर होटल को लीज़ की शर्त पर बेचना चुनौतीपूर्ण होगा।

4. सायरस मिस्त्री नैनो कार को बनाने में बढ़ते घाटे के कारण उसे बंद करना चाहते थे. अपनी बर्खास्तगी पर बोर्ड को भेजी चिट्ठी में भी मिस्त्री ने इसका ज़िक्र किया। नैनो को रतन टाटा ने सालों इंतज़ार के बाद लांच किया था।

5. टाटा के एक कर्मचारी के मुताबिक, 'रतन टाटा के समय ग्रुप के कुछ एक्जिक्युटिव जैसे आरके कृष्ण कुमार, इशात हुसैन, नोशीर सूनावाला और आर गोपालकृष्णन शामिल हैं, जिनको ग्रुप से टाटा सन्स में प्रमोट किया गया था। लेकिन मिस्त्री के 4 साल के कार्यकाल में ग्रुप से किसी को भी नहीं लिया गया। अपनी जनरल एक्जिक्युटिव काउंसिल में ग्रुप के किसी व्यक्ति को लेने के बजाय मिस्त्री कुछ बाहर के लोगों को ले आए जो बेहद साधारण थे।'
 
6. टाटा सन्स में एक व्यक्ति ने बताया कि बोर्ड इस बात से परेशान था कि 'मिस्त्री ने कार्यकाल के शुरू में किए गए अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया।' 

7. टाटा के एक पुराने एक्जिक्युटिव ने कहा, 'मिस्त्री से यह उम्मीद की गई थी वह बोर्ड के सामने एक लॉन्ग टर्म प्लान पेश करें कि आगे बढ़ने के लिए ग्रुप की क्या रणनीति होनी चाहिए। डायरेक्टर इस प्लान की मांग करते रहे लेकिन फिर उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। और आखिरकार सितंबर की बोर्ड मीटिंग में मिस्त्री ने अपना प्लान भी पेश किया, लेकिन यह किसी को प्रभावित नहीं कर सका।' 
 


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