सरकार का सख्त रवैया, मुखौटा कंपनियां नहीं बेच पाएंगी संपत्तियां

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Thursday, November 02, 2017-9:34 AM

नई दिल्लीः मुखौटा कंपनियों पर सरकार और सख्ती करने जा रही है तथा ऐसी कंपनियों की रियल एस्टेट संपत्तियां प्राधिकरण की जांच के दायरे में होंगी। ऐसी कंपनियों द्वारा अपनी संपत्तियों को बेचना या हस्तांतरण किए जाने पर भी रोक लगाई जाएगी। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे मुखौटा कंपनियों की संपत्तियों की पहचान करें और संबंधित जिलाधिकारी उन्हें अपने कब्जे में ले लें। यह कार्रवाई कंपनी कानून की धारा 250 के तहत की जाएगी। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि मुखौटा कम्पनियों के पास उनके मुख्यालय व अन्य राज्यों में अचल संपत्तियां और बैंक खाते हैं।

जब्त किए खातों की जानकारी दें बैंक
मंत्रालय ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे नोटबंदी के दौरान लेन-देन का संशोधित विवरण उपलब्ध करवाएं। सरकार ने बैंकों से 2 लाख से ज्यादा उन कम्पनियों की जानकारी उपलब्ध करवाने को कहा है जिनके खाते जब्त कर लिए गए थे। 13 बैंकों से प्राप्त आंकड़ों से पता चला है कि 5800 कंपनियों के 12,000 से ज्यादा बैंक खाते थे। इनमें कुल कंपनियों की जब्त रकम करीब 2.5 प्रतिशत है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मुखौटा कंपनियों पर लगी रोक
कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 50,818 मुखौटा कंपनियों पर कंपनी पंजीयक ने रोक लगाई है। इसके बाद दिल्ली की 44,178 और तमिलनाडु की 20,739 कम्पनियां हैं। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नोटबंदी के दौरान इन कंपनियों द्वारा 10,000 करोड़ रुपए के लेन-देन का मामला सामने आया था। सूत्रों ने कहा कि अर्थव्यवस्था में कुल अवैध धन का केवल 10 प्रतिशत है। कुल 11 लाख सक्रिय कंपनियों में से सबसे अधिक 2.34 लाख से अधिक कंपनियां दिल्ली कम्पनी पंजीयक के पास पंजीकृत हैं। वहीं मुम्बई में 1.83 लाख और कोलकाता में 1.34 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं। 

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