देर रात में सुरक्षित नहीं है PGI, छेड़छाड़ से तंग आकर नौकरी छोडऩे को तैयार नर्सेज

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Thursday, September 14, 2017-9:24 AM

चंडीगढ़ ( पाल): पी.जी.आई. में इवनिंग शिफ्ट में काम करने वाली नॢसज का ड्यूटी वक्त उनके लिए खतरे का अलार्म बन गया है और नर्सेज इन दिनों छेड़छाड़ का शिकार हो रही हैं। सूत्रों की मानें तो हर माह नर्सेज से 8 से 10 छेड़छाड़ के मामले सामने आ रहे हैं जो पुलिस थानों तक पहुंच रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ की मानें तो देर रात पी.जी.आई. से निकलना सुरक्षित नहीं है। दोपहर 2 बजे से शुरू होने वाली शिफ्ट रात 9 बजे खत्म होती है ऐसे में अगली शिफ्ट में आने वाले को काम सौंपना व ऑफ करते-करते 10 बज जाते हैं।

 

पी.जी.आई. में करीब 2600 नर्सेज हैं जिनमें से 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। अस्पताल में काम करने वाली नर्सिज में से 15 से 20 प्रतिशत को ही पी.जी.आई. कैंपस में आवास की सुविधा मिली हुई है। नर्सिंग एसोसिएशन की मानें तो 50 प्रतिशत से ज्यादा स्टाफ पंचकूला, खरड़, सारंगपुर, अंबाला जैसे दूरदराज जैसे एरिया से आता है। ऐसे में देर रात ड्यूटी ऑफ होने के बाद स्टाफ की सेफ्टी व ट्रांसपोर्ट को लेकर अस्पताल प्रबंधन कुछ नहीं कर रहा है। 


 

पी.जी.आई. ने नहीं मानी सिफारिशें 
पी.जी.आई. नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन के जनरल सैक्रेटरी सत्यवीर डागर की मानें तो ऑल इंडिया नर्सिंग कैडर द्वारा नर्सिंग कर्मचारियों के लिए देश भर में ड्यूटी का एक वक्त तय किया गया है। इस प्रोफैशन में ज्यादातर महिलाएं होती हैं इसलिए ऐसा वक्त रखा गया है जिससे उनकी सेफ्टी हो सके। इसके बावजूद पी.जी.आई. ने कैडर के बनाए वक्त को दरकिनार करते हुए तबदीली की है।  हैरान करने वाली बात यह है कि पी.जी.आई. के नर्सिंग विभाग में एक ही स्टाफ के लिए दो अलग-अलग शिफ्ट चलाई जा रही हैं। 

 

वर्ष 2014 तक सभी कर्मचारियों के लिए एक ही शिफ्ट थी, जिसमें पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक, जबकि तीसरी शिफ्ट रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक होती थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने 2015 में शिफ्ट को सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे कर दिया, वहीं दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक, जबकि तीसरी शिफ्ट रात 9 से सुबह 7 बजे तक कर दी। इसके साथ ही नया नियम सिर्फ नए स्टाफ पर लागू करने की बात भी कही गई। 2014 से पहले की ज्वाइनिग करने वाले को पुरानी शिफ्ट में ड्यूटी करने के आदेश हैं, जबकि नई भर्ती को नए नियमों के साथ आने को कहा जाता है। 


 

पर्सनल लाइफ पर पड़ रहा बुरा असर
नाम न छापने की छर्त पर कई नर्सों ने बताया कि देर रात घर आना व सुबह जल्दी घर से निकलने की वजह से उनकी पर्सनल लाइफ पर बुरा असर पड़ रहा है। यही नहीं यह टाइम टेबल कई नर्सिज की शादी में भी रूकावट बन रहा है। नर्सिंग में 30 वर्ष की उम्र तय की गई है। ऐसे में नई वाली नर्सिज 30 से नीचे की होती है। देर रात काम से लौटना उनके लिए खतरनाक हो रहा है। फिलहाल 40 से 50 नर्सिज रिजाइन देने की तैयारी कर चुकी हैं जिनमें से कई ने रिजाइन डाल भी दिया है। 


 

2 वर्ष से नहीं मिली ट्रांसपोर्ट सुविधा
2015 में पी.जी.आई. प्रशासन ने नर्सिंग विभाग को आश्वासन दिया था कि सभी कर्मियों की सेफ्टी व उनके ट्रांसपोर्ट के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। इसके बावजूद आज तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया है। कई वर्षों से हम ड्यूटी के वक्त को बदलने की मांग कर रहे हैं, हाल ही में हमने पी.जी.आई. निदेशक से इस बारे में बात भी की थी, हमें भरोसा दिया गया है कि नर्सिज की सेफ्टी व ट्रांसपोर्ट के लिए सभी जरूरी कदम जल्द उठाएं जाएंगे। जहां तक छेड़छाड़ का सवाल है तो फीमेल नर्सिज इसकी शिकार हो रही हैं। जिसमें से कई ने एफ.आई.आर. भी दर्ज करवाई है। ट्रांसपोर्ट न होने की वजह से दूरदराज से आने वाले स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -सत्यवीर डागर, जनरल सैक्रेटरी, नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन पी.जी.आई.।

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