मंदिर जाने पर रखें कुछ बातों का ध्यान, मिलेगा पुण्य लाभ

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Thursday, September 15, 2016-2:14 PM

मंदिर आस्था का केंद्र है, जहां श्रद्धालु प्रार्थना, पूजन आदि धर्म-कर्म करते हैं। शास्त्रों के अनुसार मंदिर की पवित्रता बनाए रखना सभी श्रद्धालुओं का ही कर्तव्य है। शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने पर पुण्य लाभ और देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

 
- परिक्रमा करने से मनुष्य को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है अौर पाप नष्ट होते हैं। परिक्रमा अपने दक्षिण भाग अर्थात् दाएं हाथ से शुरु करनी चाहिए। दक्षिण की तरफ परिक्रमा करने से इसे 'प्रदक्षिणा' भी कहा जाता है। मंदिर में दैवीय शक्तियों का प्रवाह उत्तर से दक्षिण की ओर होता है। बाईं तरफ से परिक्रमा करने पर सकारात्मक ऊर्जा का हमारे अंदर विद्यामान ऊर्जा से टकराव होने पर हमारा तेज कम हो जाता है। परिक्रमा करते समय बीच-बीच में रुकना नहीं चाहिए अौर न ही किसी से बात करनी चाहिए। परिक्रमा नंगे पाव की जाती है। परिक्रमा लगाते हुए देवी-देवता की पीठ की तरफ पहुंचने पर उन्हें प्रणाम करना चाहिए। परिक्रमा अधूरी करने से पूर्ण फल नहीं मिलता। 
 
- किसी भी तरह का नशा जैसे शराब, सिगरेट, ड्रग्स आदि का सेवन करके मंदिर में प्रवेश न करें। 
 
- मौजे पहन कर मंदिर में न जाएं।
 
- मंदिर के भीतर किसी के चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए।
 
- जूते और मौजे उतारने के बाद हाथ-पांव अच्छे से धोएं।
 
-  पैर या पीठ देवी-देवताओं के सामने न करें।
 
- मंदिर में फर्श पर सभी श्रद्धालु ललाट को स्पर्श करते हैं, वहां गंदगी न फैलाएं।
 
- मंदिर में हथियार लेकर न जाएं।
 
- मंदिर से निकलने पर बाहर बैठे भिखारी अथवा जरूरतमंद को धन, वस्त्र और भोजन का दान करें।
 
- चमड़े से निर्मित पर्स, बेल्ट, जेकैट, हैट आदि पहन कर मंदिर में प्रवेश नहीं किया जाता क्योंकि इससे मंदिर की स्वच्छता, शुद्धता और पवित्रता भंग होती है। चमड़ा मरे हुए पशुओं की खाल होता है, जिस पर बहुत से रसायन लगाकर गंध रहित करके ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। लोग भी बहुत चाव से इन्हें पहनना पंसद करते हैं। चमड़ा पहनना चाहे फैशन का हिस्सा है इसे हाई स्टेटस शो होता है पर क्या किसी मृत जीव की त्वचा को शरीर पर धारण करना उचित है। धार्मिक दृष्टि से ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी चमड़ा पहनना शरीर के लिए बहुत हानिकारक है। 

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