ये हैं दुर्भाग्य की निशानियां, बचने के लिए ध्यान रखें आचार्य चाणक्य की सीख

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Tuesday, July 11, 2017-2:50 PM

महान आचार्य चाणक्य जीवन दर्शन के ज्ञाता थे। उन्होंने जीवन में जो अनुभव प्राप्त किए, जिन नियमों का निर्माण किया, उन्हीं का उपदेश देकर वे इतिहास में अमर हो गए। वे महान शिक्षक भी थे। चाणक्य ने अपनी एक नीति में दुर्भाग्य की निशानियां बताई हैं। जिन लोगों के जीवन में ये बातें होती हैं, उन्हें जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।
कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।


किसी भी व्यक्ति के लिए दुर्भाग्य की बात है उसका मूर्ख या अज्ञानी होना। जो व्यक्ति मूर्ख या अज्ञानी होता है उसे किसी बात की समझ नहीं होती, जिसके कारण उसे जीवन में दुख अौर अपमान को झेलना पड़ता है। उसे जीवन में कभी भी सुख की प्राप्ति नहीं होती।

किसी व्यक्ति के लिए पराए के घर में रहना भी दुर्भाग्य की बात है। जो लोग पराए घर में रहते हैं, उसे जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूसरों के घर में रहने से जहां व्यक्ति की स्वतंत्रता खत्म हो जाती है, वहीं उसका सम्मान भी नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को पराए घर में रहने से बचना चाहिए।

आचार्य चाणक्य के अनुसार जवानी में  धैर्य खोना भी दुखदायी होता है। जवानी में जोश अौर क्रोध अधिक होता है। ऐसे में यदि धैर्य न हो तो सब कुछ बर्बाद हो जाता है। 

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