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शिव-महाकाली की इस कथा से मिलती है ये सीख

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Tuesday, February 13, 2018-5:51 PM

शिवरात्रि का दिन एक पावन दिन माना जाता है। हिंदू धर्म में मानने वाले लोगों के लिए यह पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता अनुसार इस दिन भगवान शंकर व मां पार्वती का विवाह हुआ था। शिव-पार्वती के मिलन के इस दिन को इनके भक्त उनकी वर्षगांठ के रूप में बड़े धूम-धाम से मनाते हैं। तो आईए शिवरात्रि के इस मौके पर जानें भगवान शिव से संबंधित एक कथा जिससे बढ़ी अच्छी सीख मिलती है। 

 

मां काली के चरणों के नीचे मुस्कुराते हुए शिव
एक बार काली मां (महाकाली) बहुत ज्यादा क्रुद्ध अवस्था में थीं। उनके क्रोध की अग्नि इतनी प्रचंड थी, कि समस्त सृष्टि का नाश होने पर आ गई। कोई भी देव, राक्षस और मानव उन्हें रोकने में समर्थ नहीं था। तब सभी ने महाकाली को रोकने के लिए सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण किया। महाशक्ति जहां-जहां कदम रखतीं, वहां विनाश होना निश्चित था।


भगवान शिव ने भी यह अनुभव किया कि वह महाशक्ति को रोकने में समर्थ नहीं है। तब भगवान शिव ने भावनात्मक रास्ता चुना और उन्हें रोकने पहुंचे। भोलेनाथ महाकाली के रास्ते में लेट गए। जब मां काली वहां पहुंची तो उऩ्होंने ध्यान नहीं दिया कि भगवान शिव वहां लेटे हुए हैं और उन्होंने शिव की छाती पर पैर रख दिया। अभी तक महाशक्ति ने जहां-जहां कदम रखा था, वहां सब कुछ खत्म हो चुका था। लेकिन यहां अपवाद हुआ। मां काली ने जैसे ही देखा कि भगवान शिव की छाती पर उनका पैर है, उनका गुस्सा शांत हो गया और वह पश्चाताप करने लगीं। इस एक कहानी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। मायने नहीं रखता है कि हमारे पास कितने संसाधन हैं और हम कितने शक्तिशाली हैं, कई बार ऐसे मौके आते हैं जब हमें सोच समझकर परिस्थितियों को संभालना पड़ता है। हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है, अगर सूझबूझ से फैसला लिया जाए।

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