नागपंचमी: शुभ समय पर करें पूजन, देवी लक्ष्मी के रक्षक नाग सदा रहेंगे मेहरबान

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Wednesday, July 26, 2017-12:42 PM

सावन मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता  है। इस बार यह पर्व 27 जुलाई बृहस्पतिवार को पड़ रहा है। इस दिन नागों की पूजा का विधान है। मान्यता के अनुसार नाग अर्थात सर्प धन की रक्षा हेतु तत्पर रहते हैं तथा इन्हें गुप्त और गड़े हुए धन का रक्षक माना जाता है। सरल भाषा में कहा जाए तो नाग देवी लक्ष्मी के रक्षक हैं। जो हमारे कमाए हुए मूल्यवान धन की रक्षा में तत्पर रहते हैं। अतः धन-संपदा व समृद्घि की प्राप्ति के लिए नाग पंचमी का पूजन किया जाता है। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिव के लिंग स्वरुप जी की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है तथा साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है तथा संचित धन की रक्षा होती है।


शुभ समय पर करें पूजन
नागपंचमी प्रात: 7:02 पर कर्क लग्न में आरंभ हो जाएगी। 7:14 पर कर्क लग्न समाप्त हो जाएगा। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र बृहस्पतिवार की रात्रि 4:39 पर समाप्त होगा। दोपहर 1:30 से लेकर 3 बजे तक राहु काल रहेगा। सुबह 7:05 तक भद्रा रहेगी, इस दौरान पूजन न करें। पंचमी तिथि का आरंभ सुबह 7:05 से लेकर 28 जुलाई की सुबह 6:38 तक होगा।


रावण संहिता शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के वो पितृ जो देव योनी में आ जाते हैं वो सर्प बनकर अपने वंशजो के धन की रक्षा करते हैं। ज्योतिष शास्त्रों में राहु व केतु को सर्प माना जाता है। राहु को सर्प का सिर तथा केतु को पूंछ माना जाता है। वाराह संहिता के अनुसार सफेद रंग के नाग गुप्त खजाने के रक्षक होते हैं। नागपंचमी पर्व सावन के माह में आता है जब नागों के बिल में वर्षा होने के कारण पानी घुस जाता है तब सर्व रुपी हमारे पूर्वज हमसे पूजन और भोजन की अपेक्षा करते हैं ताके ये वर्ष उपरांत हमारे नवधन की रक्षा करें इसी कारण आज के दिन नागों का धन पर रहता है पहरा।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com


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