दिलो दिमाग से Ego को निकाल फैंकेंगे तो सरलता से हल होगी हर समस्या

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Saturday, November 25, 2017-10:00 AM

एक कार कंपनी में ऑटोमोबाइल इंजीनियर ने एक वर्ल्ड क्लास कार डिजाइन की। कंपनी के मालिक ने कार का डिजाइन बेहद पसंद किया और इंजीनियर की खूब तारीफ की। जब पहली कार की टैस्टिंग होनी थी तो कार को फैक्टरी से निकालते समय उसे अहसास हुआ कि कार शटर से बाहर निकल ही नहीं सकती थी क्योंकि कार की ऊंचाई गेट से कुछ इंच ज्यादा थी। इंजीनियर को निराशा हुई कि उसने इस बात का ख्याल क्यों नहीं किया। एक सहयोगी ने सलाह दी कि कार को बाहर निकालते समय गेट की छत से टकराने के कारण जो कुछ स्क्रैच आदि आएं, उन्हें बाहर निकलने के बाद रिपेयर किया जाए। 

 

पैंटिंग सैक्शन के इंजीनियर ने भी सहमति दे दी, हालांकि उसे शक था कि क्या कार की खूबसूरती वैसी ही बरकरार रहेगी। कंपनी के जनरल मैनेजर ने सलाह दी कि गेट का शटर हटाकर गेट के ऊपरी हिस्से को तोड़ दिया जाए। कार निकलने के पश्चात गेट को रिपेयर करा लेंगे। यह बात कंपनी का गार्ड सुन रहा था। उसने झिझकते हुए कहा कि अगर आप मुझे मौका दें तो शायद मैं कुछ हल निकाल सकूं। मालिक ने बेमन से उसे स्वीकृति दे दी। गार्ड ने चारों पहियों की हवा निकाल दी, जिससे कार की ऊंचाई 3-4 इंच कम हो गई और वह बड़े आराम से बाहर निकल गई। तात्पर्य यह कि किसी भी समस्या को हमेशा एक्सपर्ट की तरह ही न देखें। एक आम आदमी की तरह भी समस्या का बढ़िया हल निकल सकता है। कभी-कभी किसी दोस्त के घर का दरवाजा हमें छोटा लगने लगता है क्योंकि हम अपने आपको ऊंचा समझते हैं। अगर हम अपने दिमाग से थोड़ी सी हवा (ईगो या अहम) निकाल दें तो आसानी से हम अंदर जा सकते हैं। जिंदगी सरलता का ही दूसरा नाम है।

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