PIX: कोल्हापुर में सूर्य की किरणें स्वयं करती हैं देवी लक्ष्मी की आराधना

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Sunday, October 23, 2016-2:58 PM

मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है। जहां देवी लक्ष्मी का मंदिर स्थित है। यहां पर माता लक्ष्मी को अम्बा जी के नाम से पुकारा जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि इस मंदिर में देवी लक्ष्मी की पूजा स्वयं सूर्य की किरणें करती हैं। 

 

कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। इसके बाद शिलहार यादव ने 9वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण करवाया था। देवी लक्ष्मी की करीब 40 किलो की प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। प्रतिमा की लंबाई लगभग चार फीट है। 27000 वर्गफीट में फैले मंदिर की ऊंचाई 35 से 45 फीट तक की है। कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी की प्रतिमा करीब 7000 वर्ष पुरानी है। 

 

मंदिर में देवी लक्ष्मी की प्रतिमा पर सूर्य की किरणें पड़ती है। 31 जनवरी से 9 नवम्बर तक सूर्य की किरणें मां के चरणों को स्पर्श करती हैं। 1 फरवरी से 10 नवम्बर तक किरणें मां की प्रतिमा पर पैरों से लेकर छाती तक आती हैं और फिर 2 फरवरी से 11 नवम्बर तक किरणें पैर से लेकर मां के पूरे शरीर को स्पर्श करती हैं। किरणों के इस अद्भुत प्रसार के कारण इस काल को किरण उत्सव या किरणों का त्योहार कहा जाता है वैसे देवी लक्ष्मी के मंदिरों में उनका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रहता है परंतु यहां ऐसा नहीं है। इस मंदिर में देवी लक्ष्मी का मुख पश्चिम दिशा की अोर है। 


 


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