भारत के अद्भूत मंदिर, सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता

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Thursday, September 01, 2016-1:29 PM
भारत में दो ऐसे मंदिर हैं जहां सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सूर्य ग्रहण के समय पर भी ये दोनों मंदिर खुले रहते हैं। एक मंदिर है उड़ीसा का कोणार्क और दूसरा है हरियाणा के यमुनानगर में स्थित सूर्यकुंड मंदिर। 
 
अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है कोणार्क का सूर्य मंदिर। विश्व स्तर के खगोल शास्त्री यहां सूर्य ग्रहण का अद्भूत नजारा देखने आते हैं। यह मंदिर उडीसा के पूर्वी जिले में चंद्रभागा नदी के किनारे कोणार्क में स्थित है। इसे कोणार्क का सूर्य मंदिर कहा जाता है।
 
इस मंदिर की कहानी भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई है। दरअसल यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित था और लोग इसे बिरंची-नारायण भी कहते थे। पौराणिक कथा के अनुसार,श्री कृष्ण के बेटे साम्ब को श्राप के अनुसार कोढ़ का रोग हो गया और इसी जगह पर उन्होंने 12 साल सूर्य देवता की तपस्या की और उनको प्रसन्न किया। सभी रोगों का नाश करने वाले सूर्य देवता ने उनको रोग मुक्त किया। साम्ब ने सूर्य देवता के सम्मान में इस मंदिर का निर्माण किया था।
 
भारत के गौरवमयी इतिहास को संजोए एक ऐसा सूर्य मंदिर जो कि हरियाणा के जिला यमुनानगर के गांव अमादलपुर में है। इस मंदिर पर सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए सूर्य ग्रहण के दिन साधू-संत और श्रद्धालु दूर-दूर से यहां दर्शनों के लिए आते हैं। 
 
मंदिर के पुजारी ने बताया कि सूर्यग्रहण के समय मंदिर के प्रांगण में आने-वाले किसी भी प्राणी पर ग्रहण का कोई असर नहीं पड़ता। मंदिर के प्रांगण में सूर्य कुंड इस प्रकार से बना है क‍ि सूर्य की‍ किरणें इस प्रकार पड़ती हैं कि वो कुंड मे ही समा जाती हैं। 
 

उन्होंने बताया कि त्रेता के मध्य से कुछ पूर्व सूर्यवंश के राजा मंधाता ने सौभरी ऋष‍ि को आर्चाय बना कर राज सूर्ययज्ञ किया। मंधाता के ऋषि ने यज्ञ भूमि को खुदवा कर उसमें पानी भरवा दिया और इस कुंड का नाम सूर्यकुंड रख दिया। पांडवों ने भी इसी सूर्य मंदिर में स्नान कर पूजा-अर्चना की थी। ऐसी मान्यता है कि यहां के सूरजकुंड में स्नान करने से सभी रोग दूर हो जाते हैं। 


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