नोटबंदी : शादी का जश्न फीका, नोटों की कमी शादियों पर पड़ रहीं भारी

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Sunday, November 20, 2016-11:27 AM

चंडीगढ़, (आशीष): नोट बंदी के चलते उत्पन्न हालात से निपटने के लिए सरकार भले ही रोज राहत के कदम उठा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें से ज्यादातर बेअसर नजर आ रहे हैं। बैंकों के पास न स्याही है और न पूरा कैश। तेजी से नए नोट बाजार में फैलाने की कोशिश शनिवार को भी शहर में नाकाम रही। शहर के कई बैंकों में पर्याप्त कैश ही पहुंचा जिससे कई लोगों को मायूस होना पड़ा। वहीं कैश की कमी के चलते शादी वाले परिवारों को 2.5 लाख रुपए देने का सरकारी आदेश भी लागू नही हो सका। बैंक अधिकारियों को कहना है कि इस बारे में उनके पास किसी भी प्रकार की गाइडलाइन नहीं आई है।

बैंकों मे भी कैश राशि इन दिनों अधिक नहीं है। दिनभर कई लोग शादी का कार्ड लेकर बैंकों के चक्कर काटते रहे। वहीं शहर के रहने वाले एक व्यक्ति के बेटे की शादी शुक्रवार को दिल्ली में सम्पन्न हुई लेकिन उन्हें शहर में अपने सगे संबंधियों के लिए पार्टी का आयोजन किया था, लेकिन बैंक के अधिकारियों ने कैश देने से ही मना कर दिया।बैंक अधिकारियों का कहना है कि उनके पास शादी के लिए कैश देने के निर्देश हैं पार्टी के लिए नहीं।   

बैंकों में 4 से 5 लाख पहुंच रहा कैश

बैकों में 4 से 5 लाख के करीब कैश पहुंच रहा है। पैट्रोल पम्पों से नकद देने की योजना चालू नहीं हो सकी। बैंकों में सुबह से ही लम्बी कतारों में सीनियर सिटीजन घंटों तक बिना लेन-देन के खड़े रहे। बैंकों मे कैश देरी से मुहैया कराया गया। वह भी कहीं महज 4 तो कहीं 5 लाख। पिछले कई दिनों से आर.बी.आई. बैंकों को इतना ही कैश दे रहा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आर.बी.आई. से कैश फ्लो नहीं बढ़ा रहा है, अभी आगे भी ऐसी स्थिति रहने वाली है।

अमिट स्याही लगाने के निर्देश आते ही बैंकों ने अपने स्तर पर बैंक मैनेजर से इसकी डिमांड शुरू कर दी थी, लेकिन बैंकों तक स्याही पहुंची ही नहीं। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार स्याही बैंक ब्रांचों में आर.बी.आई. और इंडियन बैंक एसोसिएशन के दिशा-निर्देश पर जानी थी। वहीं चुनाव आयोग ने वित मंत्रालय को पत्र भेजकर कहा है कि बैंकों मे नकदी जमा करने वाले लोगों को अमिट स्याही लगाने से इन लोगों को मतदान करने में समस्या आएगी।

अब खाताधारकों को ही पैसे दिए जा रहे हैं

शहर में अब खाताधारकों को ही पैसे दिए जा रहे हैं। शहर के अधिकतर ए.टी.एम. के बाहर युवा और बैंकों के अंदर सीनियर सिटीजन लाइन में लगे रहे। बुडै़ल गांव में रहने वाले एक व्यक्ति को हर प्रकार के नोटों एक सैंपल एकत्रित करने का शौक था, लेकिन नोटबंदी के चलते व्यक्ति का शौक भी खत्म हो गया। उनके पास जो 786 नंबर के नोट थे वह उन्होने बैंक में जमा करवा दिए हैं। जिनका उन्हें दुख है।


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