‘भ्रष्टाचार के महासागर में डुबकियां लगाते’ चंद सरकारी अधिकारी और कर्मचारी !

Edited By Updated: 12 Jul, 2026 03:29 AM

a few government officials and employees  diving in the ocean of corruption

देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाए गए कानूनों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के स्तर पर सी.बी.आई., सैंट्रल विजीलैंस कमीशन, इन्फोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.), राज्यों के एंटी करप्शन ब्यूरो, लोकायुक्त और स्टेट विजीलैंस विभाग...

देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाए गए कानूनों को लागू करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के स्तर पर सी.बी.आई., सैंट्रल विजीलैंस कमीशन, इन्फोर्समैंट डायरैक्टोरेट (ई.डी.), राज्यों के एंटी करप्शन ब्यूरो, लोकायुक्त और स्टेट विजीलैंस विभाग जैसी एजैंसियां काम कर रही हैं। इसके बावजूद देश में भ्रष्टाचार के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे तथा भ्रष्टïाचार में शामिल चंद अधिकारी करोड़ों रुपयों की अवैध सम्पत्ति बना रहे हैं। अधिकारियों द्वारा अवैध सम्पत्ति बनाने की पिछले सिर्फ 4 महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 
* 13 मार्च को ‘पटना’ (बिहार) में ‘विशेष निगरानी इकाई’ ने आय से अधिक मामले में कार्रवाई करते हुए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी व ‘बिहार मैडिकल सॢवसेज इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड’ के डिप्टी जनरल मैनेजर (प्रोजैक्ट) ‘पंकज कुमार’ के यहां छापा मारा।
छापा मारने गई टीम को देखते ही ‘पंकज  कुमार’ ने अपने फ्लैट में रखे लगभग 1.25 करोड़ रुपयों के हीरे, सोना और चांदी के गहने तथा 32 लाख रुपयों के करंसी नोट बाहर फैंकने की कोशिश की परंतु अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करके उन्हें जब्त कर लिया। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपयों की प्रापर्टी तथा बैंक खातों के दस्तावेज भी बरामद किए गए।

* 8 अप्रैल को ‘नोएडा’ (उत्तर प्रदेश) में रह रहे कमॢशयल टैक्स विभाग के रिटायर्ड एडीशनल कमिश्नर ‘केशव लाल’ के विरुद्ध विजीलैंस विभाग द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति बनाने के मामले की जांच के दौरान 100 करोड़ रुपयों से अधिक की सम्पत्ति का खुलासा हुआ। 
नोएडा स्थित उनके घर के बैड रूम के गद्दों, पूजा रूम और अलमारियों से ही नहीं बल्कि बाथरूम के बंद पड़े फ्लश से भी 10 करोड़ रुपयों की गड्डिïयां और 3 करोड़ रुपयों की ज्वैलरी बरामद हुई।
* 1 जुलाई को ‘भोपाल’ (मध्य प्रदेश) में ई.डी. ने पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी स्व. ‘अरविंद जोशी’ तथा अन्य से जुड़े मामले में उनकी 22.46 करोड़ रुपए की सम्पत्ति जब्त करने का आदेश दिया।

* 3 जुलाई को ‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ (सी.बी.आई) ने ‘भारतीय रक्षा सम्पदा सेवा’ (आई.डी.ई.एस.) के ग्रुप ‘ए’ के वरिष्ठï अधिकारी ‘ए. कुमार’ के विरुद्ध वैध आय से अधिक 5.72 करोड़ रुपयों की बेनामी सम्पत्ति जमा करने का मामला दर्ज किया।
* 7 जुलाई को ‘हैदराबाद’ (तेलंगाना) में ‘पुलिस कम्प्यूटर सॢवसेज’ में तैनात डी.एस.पी. ‘संकी रैड्डी भीम रैड्डी’ को 300 करोड़ रुपए की अवैध सम्पत्ति बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इनमें लग्जरी विला, फ्लैट, 50 एकड़ कृषि भूमि, 43.6 लाख रुपए नकद, 2 किलो सोने के गहने और 20 किलो चांदी का सामान शामिल है।
उसके घर सहित 16 ठिकानों की तलाशी के दौरान 3.60 लाख रुपए नकद और 20 लाख रुपए के बैंक बैलेंस के अलावा उसके हाथ की लिखी एक डायरी भी मिली जिसमें प्रापर्टी निवेश, देनदारियों तथा देनदारों के नाम लिखे थे।

* 8 जुलाई को ‘आगरा’ (उत्तर प्रदेश) के तत्कालीन आर.टी.ओ. ललित कुमार के ‘लखनऊ’ स्थित आवास पर विजीलैंस विभाग के अधिकारियों ने छापा मार कर अवैध तरीकों से कमाई गई लगभग 35 करोड़ रुपए की सम्पत्ति का खुलासा किया। इसमें 1.32 करोड़ रुपए नकद, 13 किलो सोना और 9 किलो चांदी बरामद करने के अलावा अनेक मूल्यवान सम्पत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए। 

* 9 जुलाई को ‘सिवान’ (बिहार) में ‘आॢथक अपराध इकाई’ के अधिकारियों ने एक्साइज इंस्पैक्टर ‘अंकेश कुमार गोंड’ के 5 ठिकानों पर छापेमारी करके  2.36 करोड़ रुपए से अधिक सम्पत्ति बरामद करके उसके विरुद्ध केस दर्ज किया।
भ्रष्टाचार के मामलों के न रुकने का एक कारण इनमें सजा का कम होना, जांच एजैंसियों द्वारा समय पर चालान पेश न करना और गवाहों का अदालत में मुकर जाना भी शामिल है। अत: यदि पुलिस और जांच एजैंसियां जांच प्रक्रिया में तेजी व सख्ती लाएं तो ज्यादा आरोपी पकड़े जा सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है।—विजय कुमार

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