'भाजपा को' कृषि आंदोलन के बारे 'कृषि अर्थशास्त्री और पूर्व मंत्री की सलाह'

Edited By Updated: 08 Jun, 2021 04:24 AM

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केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए किसानों द्वारा जारी आंदोलन के संबन्ध में कृषि अर्थशास्त्री श्री सरदारा सिंह जौहल ने कहा है कि, ‘‘देश में मौजूदा कृषि कानूनों में परिवर्तन बहुत जरूरी है। किसानों के भले के लिए लाए गए नए...

केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए किसानों द्वारा जारी आंदोलन के संबन्ध में कृषि अर्थशास्त्री श्री सरदारा सिंह जौहल ने कहा है कि, ‘‘देश में मौजूदा कृषि कानूनों में परिवर्तन बहुत जरूरी है। किसानों के भले के लिए लाए गए नए कानूनों को किसान वापस करवाना चाहते हैं तो केंद्र सरकार को पहल करके इन्हें वापस लेना चाहिए। किसान अपनी भलाई नहीं चाहते तो सरकार कानून रद्द करे।’’ 

श्री जौहल के अनुसार,‘‘केंद्र सरकार को इन कानूनों के लिए अध्यादेश लाने की जरूरत नहीं थी और यदि ले ही आई थी तो अध्यादेश को संसद में लाने के 6 महीने के भीतर किसानों से बात करके उनका भरोसा जीतना चाहिए था। सरकार ने इस पर संसद में चर्चा ही नहीं होने दी। सरकार के पास लोकसभा में बहुमत था इसलिए उसने इन्हें पास करवा लिया।’’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, ‘‘किसी के कोई भी विचार हों उन्हें सुना जाना चाहिए परंतु इस समय हालात ऐसे हो चुके हैं कि कोई भी एक-दूसरे के विचार सुनने को तैयार नहीं है।’’ 

इसी संबन्ध में अब 6 जून को पंजाब के पूर्व स्थानीय निकाय तथा मैडीकल शिक्षा मंत्री श्री अनिल जोशी (भाजपा) का बयान आया है। इसमें उन्होंने किसानों की पीड़ा समझने तथा कृषि कानूनों पर आम राय कायम करने में विफल रहने पर भाजपा नेतृत्व को किसानों का मसला हल करने की सलाह दी है। अनिल जोशी के पिता श्री किशोरी लाल जोशी की 13 जुलाई, 1991 को आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। अनिल जोशी 1986 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े तथा अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। 

उनका कहना है कि ‘‘पार्टी में पदों पर बैठे लोग जमीनी हकीकत समझने में विफल रहे हैं और उन्हें किसानों के दर्द का पता ही नहीं है। मैंने पार्टी के नेताओं से तीन कृषि कानूनों के संबंध में चर्चा की परंतु सभी ने मेरी बात की उपेक्षा की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसानों के आंदोलन के परिणामस्वरूप हम पंजाब में नगर पालिका निकायों के चुनाव हार चुके हैं तो क्या आप समझते हैं कि वे हमें विधानसभा चुनाव जीतने देंगे?’’ 

‘‘क्या आप सोचते हैं कि पिछले 6 महीनों से दिल्ली की सीमा पर जमे बैठे किसान अब झुक जाएंगे? क्या आप पर विश्वास जताने वालों की समस्याओं को सुलझाने में विफल रहने के बावजूद आप अपना अस्तित्व कायम रख पाएंगे?’’ सरकार से किसानों की बात सुनने का आग्रह करते हुए अनिल जोशी ने कहा, ‘‘किसान यह सोचते हैं कि भाजपा के नेताओं की ऊपर तक पहुंच है और वे समस्या को सुलझा सकते हैं।’’ ‘‘किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर बैठे 6 महीने से अधिक होने को आए हैं और इस दौरान हमारे इन मित्रों और इनके पारिवारिक सदस्यों सहित लगभग 500 किसान शहीद हो चुके हैं।’’ 

उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के नेता प्रदेश की राजनीति में बने रहना चाहते हैं तो उन्हें किसानों के ‘काज’ के प्रति ईमानदारी दिखानी चाहिए। नहीं तो 2022 के चुनावों में यह बात महंगी पड़ सकती है। श्री जोशी ने यह भी कहा कि पंजाब भाजपा की वर्किंग कमेटी की पिछली फिजिकल बैठक में उन्होंने ये सब मुद्दे उठाए थे। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा नेता बार-बार यह दोहराते रह सकते हैं कि कृषि कानून लाभदायक हैं परंतु यदि ये किसानों को स्वीकार ही नहीं हैं तो इनका क्या लाभ? हम किसानों को यह विश्वास दिलाने में विफल रहे हैं कि हम इस मामले में सही हैं।’’ 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेन्द्र सिंह, मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज तथा हरियाणा सरकार में सहयोगी ‘जजपा’ के नेता व उपमु यमंत्री दुष्यंत चौटाला के अलावा पंजाब के पूर्व मंत्री मोहन लाल तथा श्वेत मलिक सहित कई वरिष्ठï भाजपा नेता इससे पहले यह मसला हल करने के लिए सरकार से आग्रह कर चुके हैं। 

भाजपा को पार्टी में उठने वाली ये आवाजें सुननी चाहिएं। अगले वर्ष पंजाब, यू.पी., उत्तराखंड, मणिपुर, हिमाचल, गुजरात व गोवा में चुनाव होने वाले हैं। यदि कृषि कानूनों को चुनावों तक स्थगित कर दिया जाए या वापस ले लिया जाए तो इसका चुनावों में भाजपा को लाभ पहुंच सकता है क्योंकि इनमें अधिकांश राज्य कृषि प्रधान ही हैं। —विजय कुमार

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