‘बंगलादेश में बी.एन.पी. की सरकार’ भारत को संतुलित रवैया अपनाना होगा!

Edited By Updated: 15 Feb, 2026 03:25 AM

bnp government in bangladesh india must adopt a balanced approach

‘अवामी लीग’ की प्रमुख तथा बंगलादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘शेख हसीना’ ने छात्र आंदोलन के परिणामस्वरूप सत्ता से बेदखल कर दिए जाने के बाद 5 अगस्त 2024 को भारत में शरण ले ली थी जिसके बाद उनके कट्टïर विरोधी और ‘नोबेल पुरस्कार विजेता’ पाकिस्तान परस्त...

‘अवामी लीग’ की प्रमुख तथा बंगलादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री ‘शेख हसीना’ ने छात्र आंदोलन के परिणामस्वरूप सत्ता से बेदखल कर दिए जाने के बाद 5 अगस्त 2024 को भारत में शरण ले ली थी जिसके बाद उनके कट्टïर विरोधी और ‘नोबेल पुरस्कार विजेता’ पाकिस्तान परस्त ‘मोहम्मद यूनुस’ ने सेना की सहायता से देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख का पद संभाला। जहां ‘मोहम्मद यूनुस’ ने सत्ता में आते ही पाकिस्तान और चीन से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दीं, वहीं कट्टïरपंथियों की कठपुतली बनी उनकी सरकार भारत से दूर होती चली गई। ‘शेख हसीना’ के तख्ता पलट के 18 महीनों में बंगला देश के भारत के साथ सम्बन्ध अब तक के निकृष्टïतम स्तर पर पहुंच गए और यूनुस प्रशासन के कुशासन के कारण वहां गृह युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी।

ऐसे हालात में  सेना व कट्टïरपंथियों के दबाव में यूनुस प्रशासन ने 11 दिसम्बर 2025 को देश में 12 फरवरी, 2026 को चुनावों की तारीख की घोषणा करने के साथ ही ‘शेख हसीना’ की पार्टी ‘आवामी लीग’ पर प्रतिबंध लगाकर उसे क्रियात्मक रूप से चुनावों में भाग लेने से रोक दिया। इस प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री ‘खालिदा जिया’ की पाकिस्तान परस्त पार्टी ‘बंगलादेश नैशनलिस्ट पार्टी’ (बी.एन.पी.) तथा एक अन्य कट्टïरवादी पाकिस्तान परस्त पार्टी ‘जमात-ए-इस्लामी’ एवं उसकी 11 सहयोगी कट्टïरपंथी पाॢटयों के गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला बन गया। 
लंदन में 17 वर्ष से स्व-निर्वासन का जीवन बिता रहे ‘खालिदा जिया’ के बेटे ‘तारिक रहमान’ (60) के 25 दिसम्बर, 2025 को ढाका लौटने के पांचवें  दिन ही ‘खालिदा जिया’ की मौत के बाद ‘तारिक रहमान’ के नेतृत्व में लड़े गए इन चुनावों में बी.एन.पी. प्रचंड बहुमत से विजयी रही और ‘तारिक रहमान’ के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। बंगलादेश में जब-जब बी.एन.पी सत्ता में आती है, तब-तब बंगलादेश का माहौल पाकिस्तान जैसा बन जाता है।

आखिरी बार वहां बी.एन.पी. 2001 से 2006 तक सत्ता में रही थी और उस समय ‘तारिक रहमान’ की मां ‘खालिदा जिया’ देश की प्रधानमंत्री थीं। ‘खालिदा जिया’ के साथ ‘तारिक रहमान’ का रिश्ता कुछ ऐसा ही था, जैसा भारत में ‘इंदिरा गांधी’ के साथ उनके बेटे ‘संजय गांधी’ का था। ‘खालिदा जिया’ के प्रधानमंत्री काल में ‘तारिक रहमान’ सरकार के कामकाज में बहुत हस्तक्षेप करते थे और उन पर भ्रष्टïाचार के आरोप भी थे। 

‘तारिक रहमान’ के विरोधी इन्हें ‘खम्भा तारिक’ कहा करते थे क्योंकि  ‘खालिदा जिया’ के प्रधानमंत्री काल में बंगलादेश सरकार द्वारा देश में बिजली के खम्भे लगाने के कांट्रैक्ट की सारी रकम ‘तारिक रहमान’ डकार गए थे। जहां ‘शेख हसीना’ के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ बंगला देश के सम्बन्ध लगातार मजबूत होते गए, वहीं बंगला देश में जब-जब बी.एन.पी. की सरकार बनी, भारत के साथ सम्बन्धों में ठंडापन आ गया। बहरहाल, इन चुनावों की एक सकारात्मक बात यह है कि बंगलादेश के मतदाताओं ने कट्टïरपंथी ‘जमात-ए-इस्लामी’ की जगह एक लोकतांत्रिक पार्टी को चुना है। इसके साथ ही बंगलादेश में इस्लामिक या धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के बीच चुनाव को लेकर करवाए गए जनमत संग्रह में भी लोगों ने धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के पक्ष में मतदान किया है। 

 ‘तारिक रहमान’ ने देश को भ्रष्टïाचार और महंगाई आदि समस्याओं से मुक्ति दिलाने की बात कही है तथा बंगलादेश के लोगों की समस्याएं हल करने को अपनी प्राथमिकता बताया है जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत ने ‘तारिक रहमान’ को बधाई देकर उनसे दोस्ती और बेहतर सम्बन्धों की दिशा में पहल की है तथा ‘तारिक रहमान’ ने भी सभी देशों से बेहतर रिश्ते बनाने की बात कही है। इस बीच ‘तारिक रहमान’ के नीति सलाहकार ‘हुमायूं कबीर’ ने ‘तारिक रहमान’ के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रित किए जाने की संभावना जताई है।  इस तरह के हालात के बीच बी.एन.पी. के एक अन्य नेता ने ‘शेख हसीना’ के प्रत्यर्पण की मांग की है, अत: बंगलादेश में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव के बीच अब वहां चुनी गई सरकार के साथ संवाद में भारत को संतुलित रवैया अपनाना होगा।—विजय कुमार 

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