Edited By Niyati Bhandari,Updated: 11 Aug, 2026 10:25 AM

Surya Grahan 12 August 2026 Timing Visibility in India: 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है दुर्लभ सूर्य ग्रहण। जानें, इसका समय, भारत में दृश्यता और क्यों यह 64 साल बाद लग रहा है ऐसा खास ग्रहण।
Solar Eclipse 12 August 2026: खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 का 12 अगस्त का दिन बेहद ऐतिहासिक होने वाला है। इस दिन सावन की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) पर एक ऐसा दुर्लभ सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक और आम लोग उत्सुक हैं। इस ग्रहण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके दौरान कुछ समय के लिए दिन में ही 'रात' जैसा मंजर दिखाई देगा।

क्यों खास है यह सूर्य ग्रहण?
वैज्ञानिकों के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह ग्रहण एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। यूरोप की मुख्य भूमि पर करीब 27 साल बाद (1999 के बाद) ऐसा नजारा देखने को मिलेगा। वहीं, ब्रिटेन के लिए यह और भी खास है क्योंकि वहां के लोग करीब तीन दशकों के बाद इतना शानदार ग्रहण देखेंगे, जिसमें सूर्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा। इसके बाद ऐसा दुर्लभ नजारा दोबारा देखने के लिए 64 साल का लंबा इंतजार करना होगा, क्योंकि अगला ऐसा ग्रहण 23 अगस्त 2090 को लगेगा।
थम जाएगा विश्व का मंजर
12 अगस्त 2026 को लगने वाले पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच इस तरह आएगा कि सूरज पूरी तरह से ढक जाएगा। यह घोर अंधकार लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक रहने वाला है। इस अंतराल के दौरान तापमान में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। दिन के उजाले में भी तारे साफ दिखाई देंगे। वैज्ञानिकों का कहना है, यह अलाइनमेंट मुमकीन हो पाता है क्योंकि सूर्य का आकार चंद्रमा से 400 गुना अधिक है लेकिन वह चंद्रमा से 400 गुना की दूरी पर भी है। तभी तो दोनों एक समान दिखाई देते हैं।

भारत पर क्या रहेगा प्रभाव?
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए किसी भी तरह का नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव भी मायने नहीं रखता। जिस समय ये ग्रहण लगेगा, उस वक्त भारत में रात होगी। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक रहेगा।
प्रकृति में दिखेंगे हैरान करने वाले बदलाव
खगोलविदों का कहना है कि जब ग्रहण अपने चरम पर होगा, तो प्रकृति में कई बदलाव महसूस होंगे। सूर्य के पूरी तरह छिपने से दिन में रात जैसा अहसास होगा। सूरज की रोशनी रुकने से अचानक तापमान गिर जाएगा और हवा में नमी महसूस होगी। ग्रहण के समय पक्षी इसे रात समझकर शांत हो जाएंगे और अपने घोंसलों की ओर लौटने लगेंगे।

सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात्रि के समय लग रहा है इसलिए भारत में इसका सूतक मान्य नहीं होगा। हालांकि धार्मिक जानकारों की मानें तो भले ही सूर्य ग्रहण का सूतक मान्य न हो लेकिन ग्रहण से संबंधित सावधानियां इस दौरान बरतनी चाहिए। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होने पर खत्म होता है। मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य दिनचर्या पर कोई पाबंदी नहीं होगी।
दुनिया के इन देशों में दिखेगा 'महा-ग्रहण'
इस ऐतिहासिक नजारे को सबसे पहले ग्रीनलैंड के आर्कटिक फियोर्ड्स में देखा जा सकेगा। उसके बाद यह आइसलैंड और फिर स्पेन में दिखेगा। यूरोप में आखिरी बार 1999 में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिला था। उसके बाद अब वर्ष 2026 में पुन: पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। स्पेन में तो यह नजारा सूर्यास्त से ठीक पहले देखा जा सकेगा, जो फोटोग्राफी का शौक रखने वालों के लिए एक शानदार अवसर होगा।
सावधानी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण सूर्य ग्रहण सीधे रूप से आंखों को प्रभावित कर सकता है। सूरज को देखना आपके रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप अंधापन और धुंधलापन हो सकता है। आंखों में जलन या दर्द की समस्या शुरु हो जाती है। इस तरह के लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने के लिए 'सोलर एक्लिप्स ग्लासेज' का उपयोग करें। सूर्य ग्रहण देखने के बाद अपनी आंखों की जांच जरूर कराएं।
