‘स्कूली बसों के चंद लापरवाह ड्राइवरों’ के कारण हो रहीं बच्चों की मौतें!

Edited By Updated: 17 Jul, 2026 02:43 AM

children are dying due to  a few careless school bus drivers

देश में सड़क दुर्घटनाओं की बाढ़-सी आई हुई है। यहां तक कि चंद ड्राइवरों द्वारा स्कूली बसें लापरवाही और तेज रफ्तार से चलाने के कारण दुर्घटनाएं होने से मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ रही है, जिसकी इसी वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

देश में सड़क दुर्घटनाओं की बाढ़-सी आई हुई है। यहां तक कि चंद ड्राइवरों द्वारा स्कूली बसें लापरवाही और तेज रफ्तार से चलाने के कारण दुर्घटनाएं होने से मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ रही है, जिसकी इसी वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 21 जनवरी को ‘दरभंगा’ (बिहार) में एक स्कूली बस के ड्राइवर द्वारा लापरवाही से बस मोडऩे से लगे झटके तथा बस की खिड़की खुली होने के कारण  ‘मो. समा’ नामक छात्र की चलती बस से बाहर गिर कर मौत हो गई। 
* 28 फरवरी को ‘कासगंज’ (उत्तर प्रदेश) के ‘ढोलना’ क्षेत्र में एक स्कूली बस में घर लौट रही 7 वर्षीय ‘अनन्या’ नामक छात्रा दौड़ती बस के टूटे हुए फर्श के छेद से नीचे गिर गई। इसके परिणामस्वरूप उसी बस के पहिए के नीचे आकर उसकी जान चली गई।
* 2 अप्रैल को ‘गोपालगंज’ (बिहार) के ‘महम्मदपुर’ के ‘मसूरिया’ गांव में अपने घर के बाहर खड़े बच्चे को वहां से गुजर रही एक तेज रफ्तार स्कूली बस ने कुचल दिया जिससे बच्चे की मौत हो गई। 

* 8 अप्रैल को ‘फतेहपुर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘चकिया’ गांव  के निकट एक ओवर स्पीड स्कूली बस ने साइकिल पर जा रहे एक छात्र को टक्कर मार दी जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। 
* 8 अप्रैल को ही ‘मेरठ’ (उत्तर प्रदेश) के ‘दौराला’ में बच्चों को स्कूल लेकर जा रही एक बस बेकाबू हो कर 12 फुट गहरी खाई में जा गिरने से कई बच्चे घायल हो गए तथा ड्राइवर बच्चों को उनके हाल पर छोड़ कर भाग गया।
* 13 मई को ‘शाहजहांपुर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘हम्जापुर’ चौराहे पर एक स्कूली बस तथा ट्रैक्टर ट्राली की टक्कर में 12 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राएं तथा अध्यापक घायल हो गए।
* 2 जुलाई को ‘बीकानेर’ (राजस्थान) के ‘जसरासर’ इलाके  में 7 वर्षीय ‘शौर्य’ नामक बालक रोज की तरह अपनी स्कूली बस से उतर कर घर की ओर बढ़ा ही था कि बस के ड्राइवर ने बस को आगे बढ़ा दिया। इससे बस का एक पहिया उसके सिर के ऊपर से निकल जाने से ‘शौर्य’ की मौत हो गई। 

* 9 जुलाई को ‘आजमगढ़’ (उत्तर प्रदेश) में एक स्कूली बस बिजली के खम्भे से टकरा कर पलट जाने से एक छात्र ‘यूनुस’ की मौत हो गई।
* 10 जुलाई को ‘जयपुर’ (राजस्थान) में बच्चों से भरी स्कूली बस पलट जाने से उसमें सवार लगभग एक दर्जन बच्चे घायल हो गए।
* 15 जुलाई को ‘माछीवाड़ा साहिब’ (पंजाब) में 3 वर्षीय मासूम ‘समरदीप सिंह’ अपनी मां के साथ हमेशा की तरह अपनी बहन ‘रमनदीप कौर’ को स्कूली बस तक छोडऩे आया था। ‘रमनदीप कौर’ के बस में बैठने के बाद अचानक ड्राइवर ने बस चला दी जिससे ‘समरदीप’ बस के टायरों के नीचे आ गया और उसकी मौत हो गई।
* 15 जुलाई को ही ‘दिल्ली’ में ‘मजलिस पार्क मैट्रो स्टेशन’ के निकट से गुजर रही स्कूली बस द्वारा ई-रिक्शा को टक्कर मार देने के परिणामस्वरूप ई-रिक्शा में बैठी ‘प्रियांशी’ नामक छात्रा की नीचे गिर कर मौत हो गई।

* 15 जुलाई को ही ‘गोपालगंज’ (बिहार) में एक स्कूली बस के ड्राइवर ने 11 वर्षीय बच्चे को टक्कर मार दी और बस को रोकने की बजाय बच्चे को 2 किलोमीटर तक घसीटता ले गया जिससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।
* और अब 16 जुलाई को सुबह के समय ‘मथुरा’ (उत्तर प्रदेश) के ‘राल’ थाना क्षेत्र में स्कूली बस की चपेट में आने से एक 5 वर्षीय मासूम की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। 

उक्त उदाहरणों से स्पष्टï है कि स्कूली बसों के चंद ड्राइवरों द्वारा गति सीमा तथा अन्य नियमों का पालन न करने और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण बच्चों की मौतें हो रही हैं। बच्चों को स्कूल लेकर जाना और छुट्टïी होने पर घर पर सुरक्षित पहुंचाना अत्यंत जिम्मेदारी का काम है। अत: इस मामले में लापरवाही बरतने वाले ड्राइवरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके साथ ही स्कूलों के प्रबंधक भी ड्राइवरों तथा बसों पर नजर रखें ताकि बच्चों के साथ किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो।—विजय कुमार

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