‘बच्चों के मिड-डे मील में’ मिले सांप, छिपकलियां, कीड़े आदि!

Edited By Updated: 07 Jul, 2026 03:58 AM

snakes lizards insects etc found in children s mid day meal

गरीब बच्चों को स्कूलों की ओर आकॢषत करने के लिए 1995 में शुरू की गई मिड-डे मील योजना भोजन पकाने में लापरवाही तथा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संंबंधी नियमों की अनदेखी के चलते वरदान की बजाय अभिशाप सिद्ध हो रही है, जिसे खा कर बच्चे बीमार हो रहे हैं।  कहीं...

गरीब बच्चों को स्कूलों की ओर आकॢषत करने के लिए 1995 में शुरू की गई मिड-डे मील योजना भोजन पकाने में लापरवाही तथा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संंबंधी नियमों की अनदेखी के चलते वरदान की बजाय अभिशाप सिद्ध हो रही है, जिसे खा कर बच्चे बीमार हो रहे हैं। 
कहीं मिड-डे मील मेन्यू के हिसाब से नहीं बनता तो कई बार भोजन में कीड़े, छिपकलियां, मेंढक और यहां तक कि सांप मिलने की शिकायतें भी आती रहती हैं, जिसकी इसी वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 1 जनवरी को ‘ग्वालियर’ (मध्य प्रदेश) के ‘गोकुलपुर’ गांव में स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में बच्चों को परोसने के लिए बनाई गई आलू की सब्जी में मरा हुआ मेंढक निकला। 
* 6 फरवरी को ‘मधेपुरा’ (बिहार) के ‘साहूगढ़’ स्थित सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल में मिड-डे मील खाने वाले 70 से अधिक बच्चों को उल्टियां, पेट दर्द, घबराहट व बेचैनी होने लगी तथा उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। जांच करने पर सब्जी बनाने वाले बर्तन में मृत छिपकली पड़ी मिली। 

* 11 मार्च को ‘कोयम्बटूर’ (तमिलनाडु) के ‘कवुंदमपयलम’ गांव के सैकेंडरी स्कूल में परोसा गया मिड-डे मील खाते ही 44 छात्र फूड प्वाइजङ्क्षनग का शिकार हो गए और उन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि भोजन में एक छिपकली गिर गई थी। 
* 14 अप्रैल को ‘मयूरभंज’ (ओडिशा) के एक सरकारी रैजीडैंशियल स्कूल में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत पकाया गया दूषित भोजन करने से 100 से अधिक छात्र बीमार हो गए तथा पांचवीं कक्षा की एक छात्रा की मौत हो गई। 
* 23 अप्रैल को ‘मुंगेर’ (बिहार) के ‘सराधी’ गांव के सरकारी सैकेंडरी स्कूल में मिड-डे मील में पकाए जाने वाले चावल के ड्रम में मरा हुआ चूहा और उसका मल-मूत्र मिलने से हड़कंप मच गया। 
* 6 मई को ‘अलवर’ (राजस्थान) के ‘नंगली’ गांव के ‘सीनियर सैकेंडरी स्कूल’ के बच्चों को मिड-डे मील में परोसी गई दाल में मरा हुआ चूहा मिला। समय रहते पता चल जाने से यह दाल बच्चों को परोसी नहीं गई वर्ना कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी। 
* 8 मई को ‘सीतापुर’ (उत्तर प्रदेश) के ‘तारनपुर’ में स्थित ‘सरकारी स्कूल’ के मिड-डे मील में कीड़े निकले।
* 8 मई को ही ‘सहरसा’ (बिहार) के ‘महिषी’ कस्बे में स्थित सरकारी स्कूल में परोसा गया मिड-डे मील खाने के फौरन बाद 250 से अधिक बच्चे उल्टी, तेज पेट दर्द और घबराहट की शिकायत करने लगे जिस पर बच्चों को तुरंत इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंचाया गया। बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि मिड-डे मील में सांप था। 

* 30 जून को ‘खगडिय़ा’ (बिहार) में स्थित एक सरकारी स्कूल में कीड़ों वाला और खराब मिड-डे मील खाने से 25 बच्चे बीमार हो गए जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। 
* और अब 3 जुलाई को ‘दिल्ली’ में ‘हरीनगर’ के एक सरकारी स्कूल के अपर प्राइमरी विंग के बच्चों को खाना बांटे जाने के दौरान एक हैल्पर ने मिड-डे मील के एक कंटेनर के अंदर मरी हुई छिपकली देखी। उसने तुरंत प्रशासन को सूचित किया और स्कूल प्रशासन ने तुरंत भोजन का वितरण रुकवाया। 
हालांकि बच्चों को परोसने से पहले भोजन को एक अध्यापक सहित 2 वयस्कों द्वारा खा कर जांचना और कच्चे सामान व बर्तनों आदि की शुद्धता के नियमों का पालन करना जरूरी है परन्तु अधिकांश मामलों में इन नियमों का पालन ही नहीं किया जाता।  
अत: मिड-डे मील बनाकर सप्लाई करने वाली संस्थाओं की निगरानी बढ़ाने और अपने यहां मिड-डे मील तैयार करने वाले स्कूलों के किचन और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया का निरीक्षण करने तथा सुरक्षित भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने और उसके साथ ही घटिया खाद्य पदार्थ सप्लाई करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करने की आवश्यकता है।—विजय कुमार

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